इंजीनियरों ने सरकार को लगाई करोड़ों की चपत

45443428-5cbc-4f40-ba80-657245558137लोक निर्माण विभाग के इंजीनियर मनमानी कर पुलों के डिजाइन बदल रहे हैं। कमीशन के चक्कर में हो रहे इस खेल से न सिर्फ सरकार को करोड़ों की चपत लग रही है बल्कि ये पुल आवाजाही के लिए भी बेहद खतरनाक हो गए हैं। राजधानी में बने तीन पुलों की जांच में यह सच्चाई सामने आई है। विभाग के ऋषिकेश डिविजन द्वारा बनाए ये पुल 2011 से 2013 के बीच मंजूर हुए थे।

इनकी शिकायत पर हुई जांच में पाया गया कि इंजीनियरों ने मनमानी करते हुए पुल बना दिए। इससे पुलों की लंबाई-ऊंचाई बदल गई जिससे पुल पर वाहन चलाने में दिक्कत हो रही है और हादसों का खतरा बढ़ गया है। जांच के बाद ऋषिकेश खंड के ईई प्रवीन बहुखंडी, एई बीसी पंत, सुरेंद्र सिंह पटवाल, धर्मवीर सिंह व उमेश धारिया को सस्पेंड कर दिया गया है।

केस एक

रायपुर रोड लेन नंबर छह किद्दूवाला के पास 2013 में 150 मीटर लंबा पुल मंजूर हुआ था। 10 करोड़ की लागत के इस पुल के डिजाइन के अनुसार पुल के पिलरों की ऊंचाई 20 मीटर होनी थी पर इंजीनियरों ने मनमानी कर 18 मीटर के ही पिलर बनाए। साथ ही पुल की लंबाई भी बढ़ा दी। इससे पुल सड़क से नीचे हो गया है। डिजाइन बदलने से सरकार पर डेढ़ करोड़ का अतिरिक्त भार पड़ा।

केस दो

सुसवा नदी पर बड़कली में पास 6 करोड़ की लागत से 125 मीटर लंबा पुल बना। इंजीनियरों ने ऋषिकेश डिविजन के इस पुल का भी डिजाइन बदल दिया। डिजाइन के अनुसार पुल की बुनियाद 20 मीटर रखी गई पर इंजीनियरों ने पुल की गहराई 16.5 मीटर व पीयर कैप 18 मीटर कर दिया। इसके अलावा सुसवा नदी पर ही इंद्रापुरी फार्म के पास बने 100 मीटर के पुल में भी गड़बड़ी की गई। इस पुल की भी जांच चल रही है।

राज्यभर में पुलों पर सवाल

दून में लोनिवि के इंजीनियरों के खेल से राज्यभर में बन रहे पुलों और सड़कों के निर्माण पर सवाल खड़े हो गए हैं। बीते वर्षो में लोनिवि के निर्माणाधीन कई पुल टूट चुके हैं। विभागीय सूत्रों का कहना है कि यदि राज्यभर में बन रहे पुलों और सड़कों की जांच हुई तो कई बड़े घपले सामने आ सकते हैं।

एचके उप्रेती, प्रमुख अभियंता लोनिवि

ऋषिकेश डिविजन के तहत बने पुलों में गड़बड़ी पाए जाने पर इंजीनियरों को सस्पेंड कर दिया गया है। चार्जशीट देकर डिजाइन बदलने के कारण इंजीनियरों से पूछे गए हैं।

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