13 हजार शिक्षकों की नौकरी पड़ी खतरे में

शिक्षा निदेशालय में शिक्षकों ने सरकार के खिलाफ सोमवार को धरना प्रदर्शन किया। विशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षण प्राप्त शिक्षकों को डीएलएड-ब्रिज कोर्स से मुक्त करने की मांग की। शिक्षकों ने ऐलान किया है कि वह किसी भी सूरत में ब्रिज कोर्स का फार्म नहीं भरेंगे। राज्य के विशिष्ट बीटीसी के कोर्स को राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) से मान्यता नहीं है। विभाग मान्यता न होने पर भी लगातार विशिष्ट बीटीसी कराता रहा और इसके आधार पर शिक्षक भर्ती हुई। अब एनसीटीई के इस विशिष्ट बीटीसी को खारिज कर दिए जाने से ऐसे 13 हजार 175 शिक्षक एक झटके में अप्रशिक्षित शिक्षक की श्रेणी में आ गए हैं। यदि 31 मार्च 2017 तक वो एनसीटीई से तय शैक्षिक योग्यता पूरी नहीं कर पाते तो उनकी सेवाएं समाप्त कर दी जाएंगी। शिक्षा निदेशालय में सभी प्रभावित शिक्षकों ने आंदोलन शुरू कर अपना विरोध जाहिर किया।

विशिष्ट बीटीसी मान्यता विवाद में प्राथमिक शिक्षक संघ ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत से अफसरों के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। रविवार सुबह करीब 10 बजे संघ के प्रांतीय महामंत्री दिग्विजय सिंह चैहान, दून के जिलाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह कृषाली, पौड़ी के जिलाध्यक्ष मनेाज जुगरान ने सीएम से मुलाकात की। तीनों शिक्षक नेताओं ने मुख्यमंत्री से अफसरों की कार्यप्रणाली की शिकायत की। कहा कि, विशिष्ट बीटीसी की मान्यता लेने का काम अफसरों का था। लेकिन उन्होंने इसकी परवाह ही नहीं की। अब प्रदेश के डायटों में करोड़ों रुपये शिक्षक प्रशिक्षण पर खर्च हो चुके हैं, यह धन भी एक तरह से बर्बाद ही हुआ है। सीएम ने शिक्षकों को आश्वस्त किया कि उनकी समस्याओं का गंभीरता से हल निकाला जाएगा।

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