17 साल से लंबित परिवहन करार को मिली मंजूरी

उत्तराखंड के परिवहन सचिव डी सेंथिल पांड्यिन ने बताया कि पिछले सत्रह साल से लंबित उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के बीच परिवहन करार को हरी झंडी मिल गई है। आगामी एक नवंबर को लखनऊ में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की बैठक के बाद करार पर हस्ताक्षर होंगे। अब दोनों राज्यों की रोडवेज बसें फेरों के हिसाब से संचालित होंगी। बड़ी राहत ट्रांसपोर्टरों को मिलेगी। उन्हें चार माह में टैक्स कटाने से छूट मिलेगी और एक बार में ही सीधे पांच वर्ष का टैक्स चुकाया जा सकेगा। करार होने के बाद आएदिन बसों को बंधक बनाने व चालकों से हाथापाई को लेकर आने वाले मसले थम जाएंगे।

साथ ही उत्तराखंड को सालाना 15 करोड़ रुपये रुपये टैक्स भी मिलेगा। उत्तर प्रदेश से वर्ष 2000 में पृथक होने के बाद तीन वर्ष तक उत्तर प्रदेश रोडवेज की यहां सुविधाएं देता रहा। 2003 में उत्तराखंड परिवहन निगम का गठन हुआ। दोनों प्रदेशों में बसों के संचालन और परिसंपत्तियों के बंटवारे को लेकर एक राय नहीं बनी। पिछले चैदह साल में 12 मर्तबा उच्चस्तरीय कमेटी की बैठक हुईं, लेकिन सहमति नहीं बनी। गत वर्ष फरवरी में भी दोनों राज्यों के अफसरों के बीच लखनऊ में बैठक हुई थी, लेकिन बसों के ट्रिप पर मसला फंस गया। इसके बाद पांच अप्रैल 2016 को उत्तराखंड में राज्यपाल शासन के दौरान बसों के फेरे व किलोमीटर तय कर दिए थे, लेकिन मामला तभी से लंबित चल रहा है। बताया जा रहा कि उत्तर प्रदेश हर बार कोई न कोई पंगा फंसा देता था लेकिन इस बार उत्तराखंड ने इन अड़चनों को दरकिनार कर खाका बना लिया है। सचिव परिवहन के अनुसार करार पर मुहर लगने के बाद परमिटों को लेकर कोई विवाद नहीं होगा व नए रूटों पर भी बसों का संचालन आसानी से होगा। उत्तर प्रदेश रोडवेज की बसें उत्तराखंड की सीमा में रोजाना 2472 ट्रिप और एक लाख 12 हजार किलोमीटर चलेंगी। इसी क्र्रम में उत्तराखंड रोडवेज की बसें उत्तर प्रदेश की सीमा में रोजाना 1725 ट्रिप व दो लाख 40 हजार किलोमीटर चलेंगी।

यूपी रोडवेज उत्तराखंड को टैक्स नहीं दे रहा था। उसे प्रतिमाह करीब सवा करोड़ रुपये टैक्स देना होगा। उत्तराखंड को भेजे ड्राफ्ट में यूपी ने एक नई शर्त रखी थी। उसमें शून्य से पांच वर्ष तक पुरानी बस यूपी सीमा क्षेत्र में 600 किमी प्रतिदिन, पांच से सात साल पुरानी बस 400 किमी और सात साल से आयु सीमा पूरी करने तक वाली बस 200 किमी प्रतिदिन चल सकती थी। उत्तराखंड ने शर्त यह कहकर नकार दी कि ऐसा किसी राज्य के करार में नहीं है। उत्तर प्रदेश से करार के बाद उत्तराखंड का पांच राज्यों से करार हो जाएगा। पंजाब और राजस्थान समेत हिमाचल और मध्य प्रदेश से करार पहले ही करार हो चुका है। अब केवल दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ से करार होना बाकी है। इसकी कार्रवाई भी अंतिम चरण में है।

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