अडाणी की कंपनियों को दिए कर्ज के रिकॉर्ड की जानकारी नहीं दी जा सकतीः सीआईसी

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(शिव प्रसाद सती)

गौतम अडाणी की कंपनियों की जानकारी आरटीआई में नहीं दी जा रही है इसका क्या अर्थ निकाला जा सकता है इस पर सवाल उठने लगे हैं कि आखिर जो कर्जा गौतम अडाणी को दिया गया है उसकी जानकारी सरकार क्यों नहीं दे रही है। रमेश रणछोड़दास जोशी ने सूचना के अधिकार अधिनियम में जानना चाहा तो सीआईसी ने कहा कि अडाणी के कंपनियों को दिए गए कर्ज की जानकारी नहीं दी जा सकती है, जबकि कानून सबके लिए एक है, परंतु सवाल उठता है कि गौतम अडाणी के लिए कानून अलग क्यों?

सूचना अधिकार अधिनियम के अन्तर्गत जानकारियां न मिलने के कारण आम लोगों में रोष कि एक तरफ मोदी नोट बंदी कर वाह-वाही बटोर रहे हैं और दूसरी तरफ गौतम अडाणी की कंपनी को दिए गए कर्ज की जानकारी न देने पर आरटीआई कार्यकर्ता खासे नाराज हैं। गौतम अडाणी का पहले भी कई बार उछला है लेकिन गौतम अडाणी के कंपनी के कर्ज की जानकारी न देकर केंद्र सरकार और गौतम अडाणी के बीच कुछ गड़ब़झाला जरुर नजर आता है।  केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने कहा है कि उद्योगपति गौतम अडाणी की कंपनियों को दिए गए कर्ज से जुड़े रिकॉर्ड सार्वजनिक नहीं किए जा सकते हैं, क्योंकि भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने संबंधित सूचनाओं को अमानत के तौर पर रखा है और इससे वाणिज्यिक भरोसा जुड़ा है।

सीआईसी ने यह आदेश रमेश रणछोड़दास जोशी की याचिका पर दिया। जोशी एसबीआई से जानना चाहते थे कि गौतम अडाणी समूह को किस आधार पर बड़ी मात्रा में कर्ज दिए गए। उन्होंने इस बारे में साक्ष्य भी मांगे थे कि क्या कर्ज आस्ट्रेलिया में कोयला खानों से संबंधित था।

यह मामला किस स्तर तक बड़े जन हित से जुड़ा हुआ है

अब सवाल उठने लगे हैं कि यह मामला किस स्तर से जन हित से जुड़ा हुआ है अगर भारत सरकार किसी भी व्यक्ति को लोन देती है या लोन माफ करती है और उसे सार्वजनिक करने में सरकार को क्या आपत्ति है इस विषय पर मोदी सरकार पर उंगली उठने लगी है कि आखिर गौतम अडाणी के कर्ज की जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं? सूचना आयुक्त मंजुला पराशर ने अपने आदेश में कहा कि सीपीआईओ अपीलकर्ता को सूचित करता है कि मांगी गई सूचना वाणिज्यिक है और तीसरे पक्ष के भरोसे के आधार पर इसे रखा गया है। इसीलिए इसे उपलब्ध नहीं कराया जा सकता है और आरटीआई कानून की धारा आठ (1)(डी) (वाणिज्यिक विश्वास) और (ई) (अमानत) के तौर पर पड़ी चीज संबंधी प्रावधान के तहत सूचना देने से इनकार किया जाता है।

सुनवाई के दौरान एसबीआई ने दावा किया था कि जोशी ने गौतम अडाणी समूह के बारे में जानकारी मांगी थी। एसबीआई के केंद्रीय जन-सूचना अधिकारी (सीपीआईओ) ने दावा किया कि जोशी ने अपने आरटीआई आवेदन में यह जिक्र नहीं किया है कि यह मामला किस स्तर तक बड़े जन हित से जुड़ा हुआ है।

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