देहरादून में अमित शाह की मीडिया संवाद फिक्स था ?

शिव  प्रसाद  सती/देहरादून

जैसा  की  कल  हमने  आपको  बताया  की उत्तराखंड  मैं  लोकतंत्र  की  हत्या  क्योँ  हो  रही  है ?इसके  लिए  बीजेपी  ही  नहीं  बल्कि  वो  पत्रकार  भी जिमेदार हैं  जो  इस तरह  की  प्रेस  कोन्फेरेंस को अटेंड करती  हैं ?क्या  पूरा  सच  क्या  है आपको  बताने  की कोशिस  करेंगे की  बीजेपी  के मीडिया  प्रभारी  के  अनुसार कुछ  ही  पास मीडिया  को  दिए जाते  हैं ?जो उनके  अपने  खास  होते  हैं ?शंखनाद  टुडे  ने पहले  ही  दावा  कर दिया  था  की  मीडिया  को  अमित शाह  की  प्रेस  कांफ्रेंस  से  दूर  रखा  जायेगा ?
उत्तराखंड  बीजेपी  की सोच पूरी तरह अलोकतांत्रिक और तालिबानी है। यदि 6 माह की उत्तराखंड भाजपा सरकार ने चुनावी वायदे पूरा न कर यहां की जनता से धोखा किया है तो भाजपा के कर्णधारों से सवाल पूछना पत्रकारों का मौलिक-संवैधानिक हक है।
उत्तराखंड के मीडिया को इस तरह के डर, दबाव व अपमानजक हालात में किसी व्यक्ति विशेष सिलेक्टेड मीडिया संवाद का बायकॉट करना चाहिए। अमित शाह को बताया जाना चाहिए कि यह पेशावर कांड के महानायक वीर चंद्रसिंह गढ़वाली और हेमवतीनंदन बहुगुणा जैसी महान हस्तियों की जन्मस्थली है। ज्ञात रहे कि 1980 में कांग्रेस में लौटे बहुगुणा को अपमानित करने पर 1981 के चुनाव में पर्वतीय लोगों ने इंदिरा गांधी तक को धूल चटा दी थी, तो ये छोटे लोग किस खेत की मूली हैं।
तब का इतिहास गवाह है कि जनता पार्टी सरकार के विदा होने पर सत्ता में लौटी प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने टिप्पणी कर दी थी कि बहुगुणा ने 1980 का गढ़वाल लोकसभा का चुनाव मेरी लोकप्रियता के कारण जीता है। बहुगुणा ने इस बयान को गढ़वाल की जनता का भारी अपमान माना। इस पर उन्होंने अपनी लोकसभा सीट से त्यागपत्र देकर यहां से दोबारा चुनाव लड़ने का ऐलान किया था। बहुगुणा ने अकेले दम पर इंदिरा गांधी को यह भी चुनौती दी थी कि उनमें हिम्मत है तो मेरे खिलाफ गढ़वाल सीट से चुनाव लड़कर अपनी लोकप्रियता साबित करें। उस ऐतिहासिक चुनाव में बहुगुणा जीते थे और इंदिरा गांधी हारी थीं भले ही वे खुद मैदान में नहीं आईं।
उत्तराखंड के भाजपा नेताओं में ज़रा भी स्वाभीमान बचा है तो वे इस बेहद कठिन संवेदनशील सीमांत उत्तराखंड को केंद्र सरकार व यहां की सरकारों को दिल्ली में बैठकर हांकने वालों की उपनिवेशवादी मानसिकता का डटकर विरोध करें। यहां के जल, ज़मीन, जंगलों के सरंक्षण के लिए केंद्र से विशेष पैकेज की मांग करें। अस्पताल और शिक्षा की बदहाली ठीक करें। जो नौजवान रोज़ी-रोटी के लिए पलायन कर गए उनका ज़िलावार ब्यौरा तैयार करें।
अमित शाह से पूछें कि 13 पर्वतीय ज़िलों के विकास का बजट केवल देहरादून, हरिद्वार व उधमसिंहनगर में क्यों खर्च हो रहा है? नेता और अफ़सर 17 बरस से इस नकली राजधानी देहरादून में बैठकर क्यों मौज काट रहे हैं? गैरसैण में राजधानी का क्या हुआ? 100 दिन में लोकायुक्त कानून क्यों नहीं लागू हुआ? गंगा को स्वच्छ बनाने का वायदा क्यों दम तोड़ रहा? देशभर के नेताओं, अफ़सरों और माफ़िया गिरोहों की कितनी बेनामी संपत्ति ज़ब्त हुई? क्या इन सवालों का सच जानने का हक नहीं है जनता को!
मीडिया संवाद  को  पत्रकारों  से  दूर  रखने  की  साजिश  का  हमने  पर्दाफाश किया  ?और  ये   सारी साजिश  प्रदेश  के मीडिया  प्रभारी देवेन्द्र  भसीन  की  है ?देवेन्द्र  भसीन   बीजेपी  के प्रवक्ता  भी  हैं ?और   कई सालो  से  बीजेपी  के  मीडिया  को  देखते  हैं ?पर  यहाँ  पर  गिने चुने मीडिया  को  पास  देकर प्रदेश  की      मीडिया  मैं  गुस्सा  है    की  आखिर  गिने  चुने  ही  लोगों  को पास  क्योँ ?इसका  जबाब  तो देवेन्द्र  भसीन   ही  बता  सकते  हैं  उनकी  क्या  योजना  था  मीडिया  को  दूर  रखने  की ?लेकिन मीडियाकर्मी  बताते  हैं  जिन  लोगों  को     पास  था  उतने  ही  लोगों  को  भोजन  की   व्यवस्था    भी  थी ?सिर्फ  40 मीडिया वालों  के पास  थे ?लेकिन  मीडिया  को  दूर  रखकर  कितने  दिन  तक बीजेपी    दूर  रह  पायेगी   यह सवाल  अभी  भविष्य  के गर्व    है ?

 

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