उत्तराखंड में शिक्षा विभाग का गजब कारनामा, बेसिक शिक्षिका का चोरी-छिपे किया दून तबादला

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उत्तराखंड में शिक्षा विभाग एक बार फिर शिक्षकों के तबादलों को लेकर कठघरे में आ खड़ा हुआ है। प्रदेश में शिक्षा विभाग का घोटालों और घपलों से चोली दामन जैसा साथ हो गया है और आए दिन वह किसी न किसी घपले में फंसता ही रहता है, कभी फर्जी शिक्षक घोटाला तो कभी तबादलों को लेकर वह विवाद में बना ही रहता है, इसी कड़ी में शिक्षा विभाग का एक और कारनामा सामने आया है। प्रदेश में जहां कैबिनेट के आदेश के दो महीने बाद भी आम शिक्षकों के तबादले की प्रक्रिया शुरू तक नहीं की। वहीं, अल्मोड़ा के एक प्राथमिक स्कूल की शिक्षिका का तबादला गुपचुप तरीके से देहरादून कर दिया गया। सरकार के स्तर से ही मानकों की धज्जियां उड़ती देख आम शिक्षक हैरान हैं।

सरकार ने 12 जुलाई को उत्तराखंड में तबादलों पर रोक लगाते हुए शून्य सत्र घोषित कर दिया था। पर, शिक्षकों के तबादलों को अगस्त में छूट दे दी गई। कैबिनेट में हुए फैसले के बाद शिक्षा विभाग ने सरकार को तत्काल ही तबादलों का प्रस्तावित टाइम टेबल भी बनाकर भेज दिया। उस टाइम टेबल पर मंजूर करने के बजाए सरकार ने 19 सितंबर को नया आदेश कर दिया। इसके तहत केवल जरूरतमंद शिक्षकों के ही तबादले होने हैं, पर इस पर भी अब तक कार्रवाई शुरू नहीं हुई है।

दूसरी तरफ, इसी बीच कुछ दिन पहले बेसिक शिक्षा विभाग ने अल्मोड़ा जिले के भैरंगखाल प्राथमिक स्कूल की सहायक अध्यापक चंद्रकाता भट्ट का तबादला देहरादून कर दिया। अपर निदेशक-बेसिक महावीर सिंह बिष्ट की ओर से जारी तबादला आदेश में लिखा गया है कि यह तबादला बेसिक शिक्षा निदेशक के अनुमोदन पर किया गया है। इस तबादले में अफसरों को इतनी जल्दी थी कि भट्ट के लिए देहरादून में कोई स्कूल भी तय नहीं किया। उनका तबादला स्कूल के बजाए देहरादून के नाम पर हुआ है। सरकार के इस फैसले से शिक्षकों में रोष है।

प्राथमिक शिक्षक संघ के महामंत्री दिग्विजय सिंह चैहान ने तल्खी से कहा कि इस प्रकार चोरी-छिपे तबादलों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि तबादले करने ही हैं तो सरकार बीमार और जरूरतमंद शिक्षकों के करे।

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