शिमला जिले की दसवीं कक्षा की एक मासूम छात्रा को दरिंदे, र्ददनाक मौत दे गए

हिमाचल /शिमला
पहाड़ की बेटी से हैवानियत तो सब खामोश क्यूं है ???
शिमला जिले की जघन्य घटना है?दिल दहला देने वाली घटना है सोसल मीडिया मैं तेजी से वायरल हो रही गुडिया की मौत की खबर पुरे हिमाचल मैं मातम है आखिर गुडिया का क्या कसूर था जो घटना घटित
देव भूमि में दसवीं कक्षा की एक मासूम छात्रा की अस्मत लुट हुई है वह निंदनीय है ? गई हवस के बहशी दरिंदे उसे र्ददनाक मौत दे गए लेेकिन कहीं कोई आक्रोश नहीं! क्या पहाड की बेटी की दिल्ली की निर्भया से अलग है ? अगर नहीं तो निर्भया पर हुई ज्यादतियों पर महीनों सीना पीट पीट कर खुद को संवदेनशील साबित करने वाले टीवी चैनल आज खामोश क्यूं है? ब्रेकिंग खबरों में सबसे तेज होने का दावा करने वाले टीआरपी के भूखे न्यूज चैनल मौन क्यूं है?खबरों की खोज में चांद तक पंहुचने वाले न्यू्ज चैनलों के लिए हिमाचल तक पंहुचना क्यों मुशकिल हो गया?अखबारों ने भी दिल दहलाने वाली खबर को दो कालम में निपटाने की औपचारिकता मात्र ही पूरी की। यही मामला दिल्ली ,चंडीगढ या किसी बडे शहर का होता तो शायद खबर के लिए पूरा पेज भी कम पडता, संपादकीय अलग से लिखे जाते। अफसोस पहाड़ की बेटी को न्याय दिलाने की जंग में कलम की धार कुंद है तो टीवी चैनल के बडबोले ऐंकरों के मुंह बंद है ।क्या सच में दिल्ली इतनी दूर है कि पहाड़ की बेटी का क्रंदन वहां बैठे बडे बडे समाज सेवी संवदेनशील लोग व नेता नहीं सुन पा रहे! हवस के भूखे भेडियों ने जिस शरीर को नोचते हुए मासूम बच्ची की जान ले ली मौत के बाद भी हमारे सभ्य समाज के कुछ पढ़े लिखे लोग छात्रा के उसी नग्न मृत शरीर को व्हाटसअप पर वायरल कर रहे हैं।

जिस इज्जत को बचाते बचाते मासूम छात्रा ने दर्दनाक मौत को गले लगा दिया ,उसकी वह इज्जत मौत के बाद भी नगन मरे पड़े शरीर के साथ सोशल साईटस पर लुट रही है।ये कैसी इंसानियत है? ये कहां का न्याय है। समझ नहीं आता । इतना सब हो रहा है फिर भी सब खामोश है।आखिर कयूं? कहीं से भी अपराधियों की शीघ्र गिरफ़तारी की मांग नहीं उठ रही। समाज सेवी संगठन समाज के बडे बडे ठेकेदार, ट्विटर पर हैश टैग ट्रेंड़ चलाने वाले इक्क्सवी सदी के नेता, मंत्री , मुख्यामंत्री , सैलिब्रेटी सब चुप हैं। निर्भया के मामले में लगा था कि अत्याचार के खिलाफ देश एक है। होना भी चाहिए । लेकिन आज मन दोहरी पीडा से व्यथित है। क्या पहाड की बेटी की चीखें पहाडों में दफन होकर रह जाएगी? अगर हां तो यकीनन हम व हमारा समाज असवेंदनशीलता की उस पराकाष्ठा पर पंहुच रहें हैं जहां अब ऐसे अपराध भी हमें समान्य घटनाक्रम लगने लगे हैं । समाज किस दिशा में जा रहा है यह चिंतन का विषय है ।लेकिन कब गुडिया के गुनाहगारों को सजा मिलेगी यह वभिस्य के गर्भ मैं है ?सवाल उठता है की हिमाचल पुलिस की भूमिका भी संधिग्ध है ?३ तारीख को हुए घटनाकर्म मैं आज 13 दिन हो गए हैं ?कब गुडिया को न्याय मिलेगा ?और दोषियों को सजा ?
साभार उदय प्रताप राना की फेसबुक वाल से

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