भ्रष्टाचार रोकने के लिए पुरस्कार और दंड दोनो ही नीतियां अपनायी जायेंगीः त्रिवेन्द्र  रावत 

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने स्वतंत्रता दिवस की 70वीं वर्षगांठ के अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई दी है। मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता संग्राम के उन सभी ज्ञात और अज्ञात शूरवीरों को श्रद्धापूर्वक नमन किया है, जिन्होने स्वतंत्रता दिलाने के लिए संघर्ष किया, अनेक यातनाएं सही, यहां तक कि अपना जीवन न्यौछावर कर दिया। मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन के शहीदों और आन्दोलनकारियों को भी श्रद्धापूर्वक नमन किया है।
स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर प्रदेशवासियों के नाम जारी अपने संदेश में मुख्यमंत्री ने कहा है कि आजादी के इन 70 वर्षों में हमारा लोकतंत्र न्याय, स्वतंत्रता, समता और भाईचारे के चार स्तंभों पर मजबूती से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि राज्य सरकार ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राज्य के सतत् विकास के लिए कुछ लक्ष्य निर्धारित किये है, जिन्हें 2022 तक पूरा किया जायेगा। इनमें 2022 तक प्रत्येक जिले की प्रति व्यक्ति आय और किसानों की आमदनी को दोगुना करना है। 2022 तक हर बेघर को आवास मुहैया कराना, सभी बसावटों को पीने का पानी उपलब्ध कराना, मातृ-मृत्यु दर और शिशु-मृत्यु दर में कमी लाना, हर गांव को सड़क से जोड़ना तथा 5 लाख बेरोजगार युवक युवतियों को स्किल करना है। 2019 तक हर घर तक बिजली पहुंचाना तथा 100 फीसदी साक्षरता दर हासिल करना है। इन सब लक्ष्यों की पूर्ति के लिए राज्य सरकार कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ेंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा है कि उन्होंने आजादी के पर्व पर राज्यहित में मैंने संकल्प लिया है कि राज्य को भ्रष्टाचार से आजादी, नशे से आजादी, गंदगी से आजादी, एक वृक्ष लगाने का संकल्प और पानी को बचाने का संकल्प लिया है। इस संकल्प से सभी प्रदेशवासी जुड़े, ताकि हम एक आदर्श, सुशासन और विकसित उत्तराखण्ड के सपने को साकार कर सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हम एक ऐसी व्यवस्था का निर्माण कर रहे है, जहां किसी को भी भ्रष्टाचार करने का मौका ही न मिले। इसके लिए पुरस्कार और दंड दोनो ही नीतियां अपनायी जायेंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि विभागों की योजनाओं और कार्यक्रमों की रिव्यू, मॉनीटरिंग एवं फॉलोअप हेतु सी.एम. डैशबोर्ड बनाया जा रहा है। सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार के मामलों की जांच के लिए राज्य सरकार एक स्थायी भ्रष्टाचार जांच आयोग का गठन करने जा रही है, जो निर्धारित समय सीमा के भीतर भ्रष्टाचार के सभी मामलों की जांच करेगा और दोषियों को दंड मिलेगा। राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में सुशासन एवं सुनियोजित विकास के संकल्प को सिद्ध करने के लिए ’’सेन्टर फॉर गुड गवर्नेन्स‘‘ का गठन किया है। समाधान पोर्टल के अंतर्गत पब्लिक ग्रीवांस रिड्रेसल सिस्टम को आईवीआरएस से कनेक्ट किया गया है, जिससे आम जनता द्वारा फोन व सोशल साइट पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकेगी। सभी विभागों को सिटीजन चार्टर तैयार करने का लक्ष्य दिया गया है। सेवा के अधिकार को और सशक्त किया गया है इसकी प्रतिमाह मॉनिटरिंग की जा रही है। विभागों के एकीकरण की प्रक्रिया आरंभ की गई है। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की है कि राज्य के बहुआयामी विकास एवं भ्रष्टाचार मुक्त पारदर्शी शासन के लिए सभी अपना योगदान दें। सुराज सिर्फ सरकार के प्रयासों से नही आता, इसके लिए जन-सहभागिता की जरूरत भी होगी।
प्रदेश सरकार ने पलायन को रोकने के लिए ग्रामीण विकास एवं पलायन आयोग का गठन किया है। उत्तराखण्ड वासियों को प्रदेश के विकास से जोड़ने के लिए प्रवासी उत्तराखण्ड परिषद का गठन किया जायेगा। कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए एक लाख युवाओं को स्किल्ड करने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा कि स्किल इंडिया के लिए स्किल उत्तराखंड की सोच को बढ़ाना होगा। उत्तराखण्ड को ऊर्जा प्रदेश के रूप में स्थापित करने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। जल संचय एवं संवर्द्धन के लिए प्रत्येक जनपद में कम से कम एक नदी या बड़े जल स्रोत को प्रदूषण मुक्त एवं पुनर्जीवित करने का लक्ष्य रखा गया है।
 मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने कहा कि किसानों के हित में विभागों का एकीकरण किया जाएगा। जल्द ही सरकार पौधशाला अधिनियम बनाने जा रही है। किसानों को लाभकारी मूल्य देने के लिए कई कृषि जीन्स का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाया गया है। जैविक खेती को बढ़ावा देने के साथ-साथ क्लस्टर आधारित खेती को आगे बढ़ाया जाएगा।
अपने संदेश में मुख्यमंत्री ने प्रदेश वासियों से आग्रह किया कि उत्तराखंड को स्वच्छ प्रदेश बनाने के लिए हम सबको सामूहिक प्रयास करने होंगे। हमें हफ्ते में कुछ समय स्वच्छता के लिए लगाना होगा। जो प्रदेश पर्यटन का केन्द्र हो, वहां गंदगी का क्या काम। इसलिए जरूरी है कि सब साथ मिलकर स्वच्छ उत्तराखंड बनाने के लिए काम करें। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड ग्रामीण क्षेत्र में खुले में शौच से मुक्त होने वाला चौथा ओडीएफ राज्य बन गया है। राज्य सरकार ने उत्तराखण्ड के शहरी क्षेत्र को भी मार्च, 2018 तक ओडीएफ बनाने का संकल्प लिया है। मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र ने कहा है कि राज्य सरकार कृषि, शिक्षा, पेयजल, स्वास्थ्य, सामाजिक सहित सभी क्षेत्रों में एक ठोस कार्ययोजना के तहत कार्य कर रही है। उन्होंने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सभी प्रदेशवासियों से उत्तराखण्ड के विकास में अपना सक्रिय योगदान देने की अपील की है।
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