पाकिस्तान के लिए परेशानी का सबब है ब्रिक्स 

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(मनोज इष्टवाल)
ब्रिक की परिकल्पना 2001 में हुई और 2009 तक इसके चार देश ब्रिक ही रहे। 2010 दक्षिण अफ्रीका के इसमें शामिल होते ही ब्रिक नाम चतुर्भुज जिसमे चीन, रूस, ब्राजील और भारत शामिल थे पंचभुज बन एक ऐसा पंच तत्व बन गया कि यह ब्रिक से ब्रिक हो गया। ब्रिक की कल्पना सर्वप्रथम इन्वेस्ट बैंकगोल्डमैन सेक जिम ओ नील ने 2001में की जिसका 2009तक गठन हुआ।

विगत बर्ष ब्रिक्स सम्मेलन रूस में हुआ और इस बार भारत बर्ष में हुआ। ब्रिक्स के शामिल देश अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर सबसे ज्यादा जीडीएफ लगभग 23.1 प्रतिशत का लाभांश ले रहे हैं । यही नहीं 15 साल में इस ग्रुप ने अपना जीडीएफ तीन गुना बढ़ाया है। ब्राजील सबसे ज्यादा इम्पोर्ट एक्सपोर्ट करने वाला देश इसी ब्रिक्स नामक सेतु के कारण बन पाया है वहीँ भारत को चीन के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में विश्व का तेजी से उभरता शक्तिशाली देश कहा जा रहा है।

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ब्रिक्स शिखर सम्मेलन ने पाकिस्तान के माथे पर न सिर्फ पसीना लाया हुआ है बल्कि उसकी हालत इसलिए बेहद पतली है क्योंकि जहाँ चीन ने आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को सपोर्ट करने के लिए साफ़ मना कर दिया है वहीँ रूस ने भी स्पष्ट कर दिया है कि वह कोई भी ऐसा सौदा पाकिस्तान से नहीं कर रहा है जिस से उसकी मारक क्षमता में वृद्धि हो । वह भारत के आतंकवाद मुद्दे का समर्थन करता है और ऐसा सौदा भविष्य में पाकिस्तान से करने का बिलकुल इच्छुक नहीं है जिसमे युद्धपोत, मारक विमान इत्यादि शामिल हों। वहीँ भारत रूस के पांच एस-400 एंटी मिसाइल डिफेन्स सिस्टम, 200 कामोव, केए 226 टी हैलीकाप्टर खरीद सकता है।

एंटी मिसाइल डिफेन्स सिस्टम पाकिस्तान के साथ साथ चीन की नींद उडाने का भी जरिया है क्योंकि यह सिस्टम 400 किमी दूर से आ रहे टारगेट को न सिर्फ ट्रेक करेगा बल्कि उसे डिफ्यूज कर चीन व् पाकिस्तान की 36 न्यूक्लियर पावर्ड बैलेस्टिक मिसाइलों को एक वक्त में टारगेट कर सकता है। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के शुरू होने से पूर्व हुई रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन व् प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी मीटिंग में आतंकवाद, एनर्जी डील, सुरक्षा सहित 16 करार हुए हैं। जिसमें 40 हजार करोड़ की सुरक्षा डील शामिल है। वहीँ चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपनी सफाई देते हुए स्पष्ट किया कि ब्रह्मपुत्र की सहायक नदी इसलिए नहीं रोकी गयी कि भारत को उस से कोई नुकसान हो बल्कि चीन ने उसमें बाँध बनाकर आर्थिक तरक्की का जरिया ढूंढा है।

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ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में वे सभी बिंदु प्रखरता से उठे हैं जिनमें आतंकवाद, मादक पदार्थ, तस्करी, धनसोधन व् संगठित अपराध शामिल हैं और ये सभी मुद्दे पाकिस्तान की कूटनीति के हिस्से रहे हैं। जिस से साफ़ जाहिर है कि पाकिस्तान अब ऐसे घिर गया है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसे कहीं मुंह छुपाने की जगह नहीं मिलेगी।
वहीँ नेपाल ने साफ़ किया है कि वह भारत चीन के सम्बन्धों को सुधारने में दूत का कार्य कर सकता है जबकि बांग्लादेश ने पाकिस्तान को एक हारा हुआ देश करार देते हुए कहा है कि वह बांग्लादेश के अंदरूनी मामलों में दखल न दे क्योंकि उसकी हर नजर पर वे पैनी नजर रखे हुए हैं।

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