फर्जी लालबत्ती लगाकर बेखौफ घूम रहे उत्तराखंड के तीर्थस्थानों में

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पूरे उत्तराखंड में लाल बत्तियों का जमावाड़ा इस कदर है, राज्य की पुलिस भी लाल बत्ती वालों से पूछताछ क्यों नहीं करती है आखिर हरिद्वार से लेकर कर्णप्रयाग तक कितनी चोैकियां और कितने थाने पड़े होंगे लेकिन किसी भी चोैकी और पुलिस वाले ने यह जानने की कोशिश नहीं की कि आखिर यह लाल बत्ती वाली गाड़ी किसकी है आखिर में जब कर्णप्रयाग पुलिस ने पूछताछ की तो पता चला कि लाल बत्ती में बैठे लोग फर्जी हैं। राज्य की मित्र पुलिस कहने के लिए तो मित्र पुलिस है लेकिन काम के नाम पर कुछ भी नहीं। आखिर में सवाल उठता है कि राज्य की पुलिस और जांच एजेंसियां व लोकल एलआईयू क्या कर रहे हैं ।

जहां उत्तराखंड राज्य पहाड़ी होने के साथ-साथ शांत भी है वहीं उसका कुछ लोग नाजायज फायदा उठा रहे हैं और लाल बत्ती का रौब दिखाकर कानून का उलंग्घन भी कर रहे हैं। अगर गौर करें तो लाल बत्तियों के नाम पर उत्तराखंड में तिवारी सरकार से लेकर आज हरीश रावत सरकार तक लाल बत्ती व गनरों के लिए दर्जाधारी मंत्री भी अपनी रौब जमाने के लिए एक गनर व लाल बत्ती चाहता है लेकिन यह इतनी बड़ी चूक आखिर कैसे हुई कि लाल बत्ती लगाकर ऋषिकेश से लेकर ब्रदीनाथ तक का सफर ये लोग फर्जी लाल बत्ती लगाकर कर आए।

कर्णप्रयाग पुलिस ने पंचपुलिया के पास फर्जी लाल बत्ती लगी एक हौंडा मोविनो गाड़ी जब्त की है। वाहन में सवार तीन लोगो में से एक स्वयं को राष्ट्रपति भवन में काम करने वाला आईएस बता रहा था , लेकिन जब राष्ट्रपति भवन में संपर्क किया गया तो वह फर्जी निकला , बाद मैं पूछताछ करने पर उसने अपना नाम रोशन दिल्ली निवासी बताया, फर्जी आईएस रोशन ने बताया कि वे लोग केदारनाथ दर्शन कर मंडल के रास्ते हुए जिला मुख्यालय गोपेश्वर के रास्ते बद्रीनाथ जी के दर्शन कर वापस लौट रहे थे कि कर्णप्रयाग में चेकिंग के दौरान पंचपुलिया में पकडे गए , पुलिस ने बताया कि इन फर्जियो के खिलाफ लोकसेवक के नाम फायदा उठाने के जुर्म में मुकदमा दर्ज किया जाएगा।

राज्य की पुलिस क्या कर रही थी?

भले ही इस सफलता पर पुलिस अपनी पीठ थपथपा रही हो मगर अब सवाल इस बात का भी है कि जिला मुख्यालय होते हुए बद्रीनाथ जी के दर्शन कर कई पुलिस थानों और चोैकियों को पार कर कैसे यह फर्जी वाहन सुरक्षित कर्णप्रयाग तक पहुचा , पुलिस की इस चूक पर सैकड़ो हिन्दुओ के आस्था का प्रतीक बद्रीनाथ धाम की सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर स्थानीय लोग सवालिया निशान भी लगा रहे हैं।

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