कैशलेस लेनदेन को नहीं समझना चाहता है विपक्षः अरुण जेटली

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केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि सरकार कैशलेस इकोनॉमी बनाना चाहती है, इसका मतलब यह नहीं है कि इस सिस्टम में कैश नहीं होगा। होगा, लेकिन कम कैश होगा। उन्होंने विपक्ष पर तंज कसा कि जनता इस बात को समझ गई है लेकिन वे इसे समझने में वक्त लगा रहे हैं।
डिजिधन कार्यक्रम में उन्होंने यह भी कहा, श्कैश वाली अर्थव्यवस्था ने जो कुरीतियां पैदा की थीं, वे कैशलेस व्यवस्था से दूर हो जाएंगी।श् इसलिए जरूरी है कि इस व्यवस्था को आम उपयोग में लाने के लिए प्रोत्साहन दिया जाए। जेटली ने बताया कि आधार कार्ड पेमेंट खासतौर पर उन लोगों के लिए शुरू किया गया, जिनके पास कार्ड्स और मोबाइल फोन्स नहीं है और लेन-देन के लिए वे सिर्फ अपने अंगूठे या अंगुली के निशान का ही इस्तेमाल कर सकते हैं।
जेटली ने कहा लकी ड्रॉ स्कीम से देश में डिजिटल ट्रांजेक्शन्स को प्रोमोट करने में बड़ी मदद मिलेगी। उन्होंने दक्षिण कोरिया का हवाला देते हुए कहा कि ऐसी स्कीमें वहां बहुत लोकप्रिय हुईं। साथ ही, उन्होंने भरोसा दिलाया कि ऐसी मुहिम से एक बेहतर देश और साफ-सुथरी इकोनॉमी का निर्माण होगा। जेटली का कहना है कि कैश इकोनॉमी के ऊपर भारी निर्भरता की वजह से ही नकली करंसी से लेकर आतंकवाद जैसी समस्याएं पनपीं।
जेटली ने कार्यक्रम के दौरान दुनिया के शीर्ष उद्योगपतियों में शामिल बिल गेट्स द्वारा डिजिटल इकोनॉमी पर उनको दिए गए एक बड़े सुझाव का जिक्र किया। जेटली ने बताया कि माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक गेट्स ने उनसे कहा था कि भारत में 100 करोड़ से ज्यादा लोगों के पास मोबाइल फोन्स और 109 करोड़ के पास आधार कार्ड हैं, इसलिए भारत में डिजिटल इकोनॉमी जरूर बूम करेगी।
बाजार की बेचैनी को शांत करने के लिए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने रविवार को सफाई देते हुए कहा कि शेयरों की खरीद-फरोख्त में दीर्घकालीन पूंजीगत लाभ पर ज्यादा टैक्स लगाने का सरकार का कोई इरादा नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुंबई में शनिवार के भाषण के संदर्भ में जेटली ने कहा कि मोदी के भाषण की मीडिया में जो व्याख्या की गई, वह सही नहीं है।

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