पुराने नोटों को बदलने का अब भी चल रहा है धंधा

भ्रष्ट बैंक अधिकारियों की मदद से अब भी पुराने नोटों को बदलने धंधा जोरो से चल रहा है। भले ही आम आदमी के लिए पुराने नोटों को बदलने के सारे दरवाजे बंद हो गए हों, लेकिन 36 करोड़ के पुराने नोटों की बरामदगी के बाद पुराने नोट बदलवाने में लगे बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। एनआइए के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में कई बड़े बैंक अधिकारियों के नाम सामने आए हैं और उन्हें जल्द ही पूछताछ के लिए तलब किया जाएगा।

एनआइए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने साफ किया कि 36.34 करोड़ की पूरी रकम आतंकी फंडिंग से संबंधित नहीं थी। बल्कि यह गिरोह पूरे देश से पुराने नोटों को सस्ते में खरीद रहा था। गिरोह पुराने नोटों को 10 से 20 फीसदी की रकम पर खरीदता था, ताकि उन्हें बाद में नए नोटों में बदलवाया जा सके। इसी सिलसिले में कश्मीर में आतंकी फंडिंग से जुड़े पुराने नोट भी उनके पास आए थे। लेकिन कितने नोट आतंकी फंडिंग से जुड़े हैं, एनआइए ने अभी तक यह साफ नहीं किया है।

शुरू में एनआइए अधिकारियों को यह समझ में नहीं आया कि आखिरकार एक साल बाद भी कोई गिरोह पुराने नोट को क्यों खरीद रहा है। क्योंकि इन नोटों को बदलवाने के सारे दरवाजे बंद हो चुके हैं और 10 हजार रुपये से अधिक के पुराने नोट रखना अपराध है। गिरफ्तार आरोपियों से जब पूछताछ हुई तो पुराने नोटों को बदलवाने में बड़ी साजिश का पता चला। आरोपियों ने कई बैंक अधिकारियों के बारे में बताया है, जिनकी मदद से वह इन नोटों को नए नोटों में बदलवाने जा रहा था।

बताया जाता है कि भारतीय रिजर्व बैंक में जगह की कमी के कारण कई बड़े बैंकों के चेस्ट में अब भी पुराने नोट रखे हुए हैं। यह गिरोह वहीं से इन पुराने नोटों को नए नोटों में बदलवा सकता था। लेकिन इन पुराने नोटों की गिनती हो चुकी है और आरबीआइ को इसके बारे में बताया जा चुका है। ऐसे में बिना आरबीआइ अधिकारी की मिलीभगत के यह कर पाना संभव नहीं दिखता है।

एनआइए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अभी तो जांच शुरू हुई है और अदालत ने सभी आरोपियों को 21 नवंबर तक के लिए एजेंसी के हिरासत में भेज दिया है। अब उनसे गहराई से पूछताछ कर मामले की तह तक पहुंचा जाएगा। उन्होंने कहा कि इस मामले में सबूत मिलने पर किसी भी बड़े बैंक अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा।

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