फूलदेई पर्व पर बच्चों ने घरों में जाकर की मंगल कामना

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उत्तराखंड में  परिवर्तन का पर्व फूलदेई धूमधाम से मनाया जा रहा है। ये पर्व एक संस्कृति को उजागर करता हैं, तो दूसरी ओर प्रकृति के प्रति पहाड़ के लोगों के सम्मान और प्यार को भी दर्शाते हैं। आज छोटे बच्चे सुबह ही उठकर जंगलों से प्योली व फ्रयूंली, बुरांस, बासिंग आदि जंगली फूलो के अलावा आडू, पुलम के फूलों को चुनकर चावल, हरे पत्ते, नारियल और पफूलों को सजाकर हर घर की देहरी पर लोकगीतों को गाते हुए घरों के देहरी का पूजन किया। बच्चों ने पफूल देई, छम्मा देई, देणी द्वार, भर भकार, ये देली स बारम्बार नमस्कार… गीत गाकर घरों में जाकर मंगल कमाना की, तो बदले में उन्हें गुड़ इत्यादि दिया गया। पहाड़ की परंपराओं को कायम रखने के लिए भी ये पर्व-त्योहार खास हैं। इस त्योहार को फूल संक्रांति भी कहा जाता है, इसका सीध संबंध् प्रकृति से है। इस समय चारों ओर छाई हरियाली और नाना प्रकार के खिले फूल प्रकृति में चार चांद लगाते हैं।

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