संतों में अस्थि विसर्जन को लेकर हुआ विवाद

बैंड बाजों के साथ संत के अस्थि प्रवाह को लेकर कनखल में संतों के बीच विवाद हो गया। इस बीच एक पक्ष आश्रम से असलहे निकाल लिए। सूचना पर पहुंची पुलिस ने बामुश्किल हालात पर काबू पाया। अंत में पुलिस की मौजूदी में संत का अस्थि विसर्जन किया गया। धार्मिक संपत्ति को लेकर वर्ष 2014 से नया पंचायती उदासीन अखाड़े कनखल में विवाद चला आ रहा है। विवाद के कारण अखाड़े की कमेटी भी दो फाड़ हो गई है। खुद अखाड़े का सचिव कहलाने वाले महंत मंगलदास बीते 29 अक्तूबर को मानसा पंजाब में ब्रह्मलीन हो गए थे। गुरुवार को महंत मंगलदास की अस्थि को लेकर करीब 100 लोग बैंड बाजे के साथ कनखल पहुंचे और अस्थि विसर्जन जुलूस प्रारंभ कर दिया।

जुलूस में ब्रह्मलीन मंगलदास को अखाड़े का सचिव बताया गया था। इस पर नया पंचायती उदासीन अखाड़ा की कार्यकारिणी बिफर गई और अपने आप को अखाड़े के अध्यक्ष बताने वाले धुनिदास, मुख्य सचिव भगतदास, त्रिवेणीदास, जगतार मुनि ने विसर्जन को रोक दिया। दोनों पक्षों में गहमागहमी शुरू हो गई। एक पक्ष हाथों में असलहे लेकर मौके पर आ गए और हवा में असलाह लहराना शुरू कर दिया। मामले की जानकारी किसी ने पुलिस को दे दी। सूचना मिलते ही पुलिस पहुंचे और आसपास के थाने से पुलिस फोर्स को भी मौके पर बुला लिया गया।

एक पक्ष ने विरोध किया कि अस्थि विजर्सन जुलूस में मंगलदास को अखाड़े का सचिव बताया गया है, जो सरासर गलत है। अखाड़े का सचिव कोई और है। शांति व्यवस्था बनाने के लिए पुलिस ने बैंड बांजे और सचिव के बोर्ड को हटवाया। जिसके बाद महंत की अस्थि को कनखल के सती घाट पर विसर्जित किया गया। एक पक्ष ने कनखल थाने में शिकायत देकर दूसरे पक्ष पर जबरन अस्थि विसर्जन रोकने का आरोप लगाया है। उधर थानाध्यक्ष अनुज सिंह का कहना है कि विवाद को देखते हुए शांतिप्रिय तरीके से अस्थि विसर्जन कराया गया। दोनों पक्षों में काफी समय से विवाद चला आ रहा है।

 

 

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