बेटी को पहुंचाना चाहती है सुधार गृह में …..

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लोहाघाट से भी कोसो दूर गांव में रहने वाली खुशबू रुद्रपुर में रोजगार का सपना लेकर आई। यहां रोजगार भी मिल गया, लेकिन सोसायटी ऐसी मिली कि उसे नशे की गर्त में धकेल दिया। अब वह नशे की गोलियों के बिना रह नहीं पाती है। बेटी की इस हालत की जानकारी मिलने पर मां भागीरथी पहाड़ से दो दिन का सफर तय कर रुद्रपुर पहुंची और बेटी को सुधार गृह पहुंचाने की कोशिश में पुलिस चैकी और अधिकारियों के यहां चक्कर लगा रही है। उसकी मदद उसके ही गांव का युवक कर रहा है।  लोहाघाट की खुशबू (काल्पनिक नाम) छह साल पहले रुद्रपुर काम की तलाश में आई थी। उसे सिडकुल में काम भी मिल गया। मां लोहाघाट से कोसो दूर गांव में खेती बाड़ी के साथ जानवर पालती है। बेटी तीन साल तक मां को पैसे भेजती रही, लेकिन इसके बाद उसके पैर लडखड़ा गए। उसकी सोसायटी ने उसे नशे की गर्त में धकेल दिया। तीन साल से वह नशीली गोलियों की शिकार है। नशे की वजह से उसका काम भी छूट गया। जिस किराये के कमरे में रहती है वहां भी उसका आना जाना कम हो गया। वह कहां रहती है कहां काम करती है, यह न तो मकान मालिक को पता और न ही उसकी मां भागीरथी को पता है। बेटी के नशेड़ी होने की जानकारी मिलने पर भागीरथी दो दिन पहले रुद्रपुर पहुंची और बेटी को खोज निकाला। मां की ममता उसे नशे की हालत में नहीं देख सकती है। उसने बेटी को समझाने की लाख कोशिश की, लेकिन नशे की आदी हो गई है। वह मां के साथ जाने गांव जाने को तो तैयार है, लेकिन मां को भरोसा नहीं कि शहर की जिसे हवा लगी है वह गांव में ठहर पाएगी। वह उसका नशा छुड़ाने के लिए अटरिया रोड पर शक्ति विहार में बने सुधार गृह में भेजना चाहती है। इसके लिए उसने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क किया है।

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