फीकी मौत लेकिन स्वागत जोरदार

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(दीपक बेंजवाल)
मुख्यमंत्री हरीश रावत आज केदारघाटी में, देर रात से शुरू हो गया पुलों का निर्माण कार्य शुरू, सोये हुये ठेकेदारो की चेतना जाग उठी।
ये कैसा देश है जहाँ एक आदमी की कीमत मुख्यमंत्री के दौरे से भी कम है, जी हाँ विगत तीन माह से केदारघाटी मे नदियो से आर पार जाने के लिऐ लगी ट्राॅलियो मे बेहद दर्दनाक हादसे सामने आये, दो मासूमो की मौत के जख्म से केदारघाटी मे जबरदस्त उबाल भी उमड़ा, जनता ने प्रर्दशन भी किए लेकिन उत्तराखण्ड के हुक्मरानो, अथिकारियो और ठेकेदारो की चेतना नहीं जागी, लेकिन आज अचानक से चमत्कार हो उठा।

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आज मुख्यमंत्री हरीश रावत का केदारघाटी दौरा है, देर सांय से अगस्त्यमुनि मे चहल पहल है, तय कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री का हेलीकाप्टर अगस्त्यमुनि मैदान मे उतरेगा जहा से वाहनो के जरिये वे डीग्री काँलेज जायेगे, यह रास्ता उसी पुरानादेवल से गुजरता है जहा कुछ दिन पूर्व एक छोटी बच्ची की ट्राली से गिर जाने से मृत्यु हो गई थी, यहा से पिछले तीन सालो से हर रोज दो हजार से भी अधिक स्कूली बच्चे, बूड़े, महिलाऐ ट्राॅलियो मे झूलकर आवजाही करते है, पिछले 3 सालो मे पुल को लेकर कई धरना प्रदशर्न भी हुए लेकिन हालात नही सुधरे, एक बड़े आन्दोलन के बाद पक्के पुल का काम शुरू हुआ, लेकिन बेहद जरूरी होते हुए भी इस पर निमार्ण धीमी गति से होता रहा, और पिछले कुछ महीनो से पूरी तरह बंद ही था,

लेकिन मुख्मंत्री के दौरे ने काम कर रहे ठेकेदार की आत्मा अचानक कल जगा दी, देर रात बड़ी बड़ी लाईट लगाकर पुल का निर्माण कार्य फिर से चालू हो गया है, और तो और नदी मे एक और अस्थाई कच्चा पुल भी बनना शुरू हो गया है, लेकिन अजब विडबंना थी कि जिस दिन ट्राली से गिरकर मासूमो की मौत हुई तब निर्माण कार्य शुरू नही हो पाऐ, यानि कि जनता मरती रहे किसी नेता, अधिकारी और ठेकेदार पर क्या फर्क पड़ता है…….
मैं हूं केदारघाटी का एक आपदा पीड़ित पत्रकार, जो तीन साल में सिर्फ इसलिए नेताओ की आँख की किरकिरी बनता रहा।

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