डेबिट कार्ड से लेन-देन होगा और सस्ता

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आने वाले दिनों में डेबिट कार्ड से लेन-देन और सस्ता हो सकता है। सरकार ने डिजिटल पेमेंट्स को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्रियों की जो समिति बनायी थी, उसने डेबिट कार्ड से लेन-देन पर लगने वाले ट्रांजेक्शन शुल्क को घटाने की सिफारिश की है। समिति की इस सिफारिश को अमल में लाने के लिए नीति आयोग ने रिजर्व बैंक से आग्रह किया कि डिजिटल पेमेंट्स की बढ़ती संख्या को देखते हुए डेबिट कार्ड से भुगतान पर लगने वाले ट्रांजैक्शन शुल्क (एमडीआर) को कम कर दिया जाए।
डिजिटल पेमेंट्स पर मुख्यमंत्रियों की समिति ने यूआइडीएआइ के पूर्व अध्यक्ष नंदन नीलेकणि को ट्रांजेक्शन शुल्क (मर्चेट डिस्काउंट रेट) की समीक्षा करने को कहा था। नीलेकणि ने अपनी रिपोर्ट समिति को सौंप दी है। इस रिपोर्ट के आधार पर मुख्यमंत्रियों की समिति का मानना है कि डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर तेजी से कदम बढ़ाने से वित्तीय लेन-देन तेजी से बढ़ रहे हैं। इसे देखते हुए ट्रांजैक्शन शुल्क यानी एमडीआर घटाने की जरूरत है। इसलिए मुख्यमंत्रियों की समिति ने आरबीआइ को इस संबंध में पेमेंट सेटलमेंट सिस्टम एक्ट 2007 की धारा 18 के तहत निर्देश जारी करने को कहा है। आरबीआइ की ओर से इस दिशा में कदम उठाने से डिजिटल पेमेंट को काफी बढ़ावा मिलेगा। इससे छोटे व्यापारियों, आम लोगों और बैंकों सहित सभी को फायदा होगा।
सूत्रों के मुताबिक नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) ने इस संबंध में आरबीआइ गवर्नर उर्जित पटेल को पत्र लिखा है। समिति मान रही है कि डेबिट कार्ड के इस्तेमाल पर हाल में संशोधित किये गये ट्रांजेक्शन शुल्क में और कमी की जरूरत है। रिजर्व बैंक ने 16 दिसंबर को एक अधिसूचना जारी कर बैंकों को निर्देश दिया है कि डेबिट कार्ड से एक हजार रुपये तक के ट्रांजैक्शन पर अधिकतम 0.25 प्रतिशत तथा एक हजार रुपये से 2000 रुपये तक के ट्रांजेक्शन पर अधिकतम 0.5 प्रतिशत शुल्क ही लगाया जगाया जाए। रिजर्व बैंक का यह नियम एक जनवरी 2017 को प्रभाव में आएगा और 31 मार्च 2017 तक लागू रहेगा। आरबीआइ के इस कदम से पहले दो हजार रुपये तक के लेन-देन पर 0.75 प्रतिशत एमडीआर यानी ट्रांजेक्शन शुल्क लगाने का प्रावधान था। 2000 रुपये से अधिक के ट्रांजेक्शन पर बैंक एक प्रतिशत तक एमडीआर वसूल सकते हैं।

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