क़र्ज़ में डूबती त्रिवेन्द्र सरकार लेगी कर्ज ….500 करोड़

एक बार फिर सरकार लेगी कर्ज : क़र्ज़ में डूबती सरकार -बढ़ेगा 500 करोड़ का बोझ

 

जब सरकार के पास पास पैसा नहीं है तो कर्ज लेकर क्योँ घी पी रही है ?कई बार इस मुद्दे पर लिख चूका हूँ ?केवल सरकारी कर्मचारियों के लिए खुश करने के लिए ?राज्य की आर्थिक स्तिथि अछी नहीं है ?सरकार संज्ञान लें ?अधिकारी को लुटने न दें ?मेरा सुझाव है की इस मसले पर त्रिवेन्द्र सरकार को फिजूलखर्ची रोकनी होगी ?

राज्य कर्मचारियों को बढ़ा महंगाई भत्ता, बोनस और एरियर देने के फेर में सरकार एक बार फिर बाजार से उधार लेने को मजबूर हो गई है। जी हां, 25 अक्टूबर को 500 करोड़ का कर्ज फिर उठाया जा रहा है। सातवें महीने में सरकार को दूसरी दफा कर्ज लेना पड़ रहा है। इसके साथ ही कर्ज बढ़कर 3200 करोड़ पहुंच जाएगा।
त्योहारी सीजन में कर्मचारियों पर तोहफों की बारिश तो हुई, लेकिन इसकी कीमत राज्य सरकार को कर्ज लेकर अदा करनी पड़ रही है। ये लगातार दूसरा महीना है जब सरकार महीने के भीतर दो बार कर्ज लेने को विवश हो गई। बीते सितंबर माह में सरकार ने दो बार क्रमश: 400 करोड़ और 500 करोड़ का ऋण लिया था। इस वजह से चालू वित्तीय वर्ष की पहली छमाही यानी सितंबर माह तक बाजार का कर्ज 2200 करोड़ तक पहुंच गया था। चालू माह में त्योहारी सीजन में सरकार ने कर्मचारियों को महंगाई भत्ता, बोनस और एरियर के साथ ही कई निगमों-उपक्रमों के कार्मिकों को भी सातवें वेतन देने के आदेश जारी किए हैं। इस वजह से चालू माह के पहले पखवाड़े में 500 करोड़ लेना पड़ा था। इस वजह से अब तक 2700 करोड़ कर्ज लिया जा चुका है। एरियर देने में ही सरकारी खजाने पर करीब 550 करोड़ का भार पड़ेगा। वर्ष 2005 के बाद नई पेंशन योजना के दायरे में आने वाले तकरीबन 50 हजार से ज्यादा कार्मिकों को करीब 200 करोड़ एरियर का नगद भुगतान किया जाएगा।
नतीजतन सरकार दो दिन बाद यानी 25 अक्टूबर को बाजार से फिर 500 करोड़ का ऋण उठाया जा रहा है। हालांकि बाजार से कर्ज मिलने में सरकार को फिलहाल दिक्कत नहीं है। रिजर्व बैंक ने राज्य के लिए चालू वित्तीय वर्ष में कर्ज की सीमा 5850 करोड़ से बढ़ाकर 6422 करोड़ कर दी है। सातवें महीने में सरकार कर्ज की कुल सीमा का तकरीबन 50 फीसद तक पहुंच रही है। वित्त सचिव अमित नेगी ने 500 करोड़ रुपये का और कर्ज लेने के फैसले की पुष्टि की।

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