बजट ने दिल्ली की उम्मीदों पर पानी फेरा: केजरीवाल सरकार

 

 

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केजरीवाल सरकार ने वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा पेश आम बजट को देश की जरूरतों से कटा हुआ और वास्तिवकता को छुपाने वाला बजट करार दिया है। दिल्ली के उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि इस बजट से दिल्ली सरकार को बड़ी उम्मीदें थीं लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इस बजट से अन्य राज्यों के साथ दिल्ली सरकार को भी केंद्रीय करों में बड़ी हिस्सेदारी की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। मनीष ने केंद्र से सवाल करते हुए ट्वीट किया, श्पार्टियों को 2000/- तक कैश लेने की छूट क्यों? सब्जीवाला 20/- के लिए कैशलैस हो जाए और पार्टियों को 2000/- कैश लेने की छूट! क्यों? दिल्ली सरकार के मुताबिक बजट में 14वें वित्त आयोग के हिसाब से दिल्ली नगर निगम में सुधार के लिए बजट आवंटन और अतिरिक्त केंद्रीय सहायता की बड़ी राशि चाहिए थी। दिल्ली सरकार ने केंद्र से 2017-18 के आम बजट में केंद्रीय करों में हिस्सेदारी के रूप में 5 हजार करोड़ देने की मांग की थी। केंद्रीय करों में अधिक हिस्सेदारी की मांग 17 वर्षों से लंबित है। वहीं दिल्ली के पर्टयन मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा, यह बजट तो ऐसा है मानो गरीबों की बस्ती में पफूल बेचा जाए। उन्होंने कहा कि यह वास्तविक तथ्यों को छिपाने वाला, अर्थव्यवस्था के लिए निराशाजनक बजट है। उल्लेखनीय है कि वित्त वर्ष 2001-2002 में दिल्ली सरकार के बजट में योजना मद के लिए 4,200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था, जबकि मौजूदा वित्त वर्ष में योजना मद में 20600 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। दिल्ली सरकार का कहना है कि योजना मद में विकास परियोजनाओं के लिए धनराशि चार गुना से अधिक की गई है। इसके बावजूद केंद्र सरकार दिल्ली को केंद्रीय करों में हिस्सेदारी बढ़ाने को तैयार नहीं है। दिल्ली सरकार का कहना है कि केंद्र दिल्ली सरकार को वर्ष 2001-2002 से केंद्रीय करों में हिस्सेदारी के नाम पर महज 325 करोड़ रुपये दे रहा है। सरकार के अनुसार राज्यों से केंद्र सरकार को दिए जाने वाले केंद्रीय करों में हिस्सेदारी में दिल्ली के साथ 15 साल से भेदभाव हो रहा है। वित्त विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक दिल्ली वाले केंद्रीय कर के रूप में 1 लाख करोड़ से अधिक हर वर्ष केंद्र सरकार को देते हैं, लेकिन इसके बदले दिल्ली को महज 325 करोड़ रुपये मिलते हैं।

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