उत्तराखंड को 4000 करोड़ भेजने के बावजूद बैंकों में लग रही भीड़

नोटबंदी के बाद पिछले 36 दिन में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) उत्तराखंड में 4000 करोड़ रुपये से अधिक का कैश भेज चुका है, फिर भी बैंक शाखाओं में भीड़ लग रही। इसकी वजह है लोग कैश तो निकाल रहे, लेकिन इसका चक्र पूरा नहीं हो पा रहा। यानी, यह पैसा बाजार से होते हुए वापस बैंक तक नहीं पहुंच पा रहा। इसीलिए थोड़ी दिक्कत हुई है। सुकून की बात ये है कि अब बैंकों तक पैसा पहुंचने लगा है और कुछ दिन में कैश की दिक्कत दूर हो जाएगी। हालांकि, फोकस डिजिटलाइजेशन पर ही रहेगा। यानी, लोग कैश कम रखें और प्लास्टिक मनी या अन्य विकल्पों का उपयोग लेन-देन के लिए करें।
यह कहना है आरबीआइ के उत्तराखंड क्षेत्रीय कार्यालय के महाप्रबंधक सुब्रत दास का। श्दैनिक जागरणश् से मुलाकात में उन्होंने कहा कि नोटबंदी को सकारात्मक रूप में लेना चाहिए। हमारी नकदी वाली अर्थव्यवस्था है और इसे डिजिटल की ओर ले जाने में थोड़ी दिक्कत तो होगी ही। पर बात समझने की है कि हमें बदलाव का लाभ लेना चाहिए, क्योंकि यह एक बड़ी उपलब्धि है। अच्छी बात ये है कि लोग अब कैशलेस व्यवस्था को समझने लगे हैं। बड़ी संख्या में लोग अब कैशलेस ट्रांजेक्शन की ओर गए हैं। साथ ही बैकों से निकाली गई नकदी अब बैंकों में आने लगी है।
उत्तराखंड में कैशलेस व्यवस्था की राह में आड़े आ रही कनेक्टिविटी की दिक्कत जल्द ही दूर हो जाएगी। आरबीआइ के महाप्रबंधक के अनुसार वी-सेट के लिए राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) से वित्तीय मदद मिलनी है। इस क्रम में बैंकों ने वी-सेट के लिए ऑर्डर दे दिए हैं। एक-दो माह के भीतर इनके स्टाल होने पर उत्तराखंड के ग्रामीण इलाकों में भी कनेक्टिविटी उपलब्ध हो जाएगी और वहां भी लोग कैशलेस व्यवस्था की ओर अग्रसर होंगे।
अभी तक के निर्देशों के अनुसार 500 व 1000 के नोट 30 दिसंबर से बैंकों में भी नहीं लिए जाएंगे। जाहिर है, तब तक लोग कैशलेस व्यवस्था में अभ्यस्त हो चुके होंगे। फिर यह बदलाव अच्छाई के लिए है और सभी को इसे स्वीकारना चाहिए।

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