कांग्रेस की उम्मीद पर पानी न फेर दें पीके

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प्रशांत किशोर उर्फ पीके की टीम ने बेशक मोदी को दिल्ली के सिंहासन में बैठाने में अपनी कुशल रणनीति का परिचय देते हुए अपने आप को साबित कर दिखाया था। लेकिन आगे भी पीके की टीम जीत का यह सिलसिला यूं ही जारी रखेगी इसकी कोई गारंटी नहीं है। क्योंकि स्वयं भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने पीके की टीम से किनारा कर लिया है। वहीं जब कि पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के ऐन मौके पर मोदी का पीके से किनारा करना पीके की टीम की कार्यशैली पर खुद ही सवाल उठाने वाला साबित होता है। शायद मोदी को भी यह अहसास हो गया है कि पीके में अब वह बात नहीं रही जिसके सहारे उनपर ही चुनाव की कमान छोड़ दी जाए। वहीं दूसरी तरपफ कांग्रेस का पीके पर इतना भरोसा करना समझ से परे है। क्योंकि पीके कोई खुदा तो नहीं हैं जिस पर आंख मूंदकर भरोसा किया जा सकता है। सूत्र बताते हैं कि मीडिया और टेक्नोलाॅजी के इस्तेमाल में माहिर मोदी ने पीके को किसी न किसी वजह से अपने से दूर किया है। इसके पीछे यह भी तर्क दिये जा रहे हैं कि मोदी को पीके से भी बेहतर हाईटेक टीम मिल गई है।

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