शिक्षा विभाग को लगी तीन करोड़ की चपत

विशिष्ट बीटीसी मान्यता प्रकरण के बाद शिक्षा अधिकारियों की एक और चूक सरकार पर भारी पड़ने जा रही है। मामला सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए) का है। अधिकारियों ने शासनादेश को संशोधित किए बिना ही भारी-भरकम वेतनमान वाले पदों पर संविदा के आधार पर कर्मचारी भर्ती कर लिए। इस चूक के आधार पर ही हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट ने कर्मचारियों को नियुक्ति से अब तक का पूरा वेतन, भत्ता और एरियर देने के आदेश कर दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के आधार पर सर्व शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना निदेशक कैप्टेन आलोक शेखर तिवारी ने इस मामले में सरकार से दिशा-निर्देश मांगे हैं। क्योंकि इस चूक से राज्य सरकार को ढाई से तीन करोड़ रुपये की चपत लगने जा रही है। वित्त विभाग ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है।

वित्त विभाग ने पूछा है कि आखिर चूक क्यों और किस स्तर पर हुई? चूंकि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में फैसला दे चुका है, लिहाजा कर्मचारियों को वेतनमान के आधार पर बकाया राशि का भुगतान सरकार की बाध्यता बन चुका है। लिहाजा, इसके लिए जिम्मेदार अफसरों की जवाबदेही भी तय की जा रही है। 11 मार्च 2005 को सरकार ने एसएसए के तहत राज्य और जिला परियोजना कार्यालय के लिए 22 पदों को मंजूर किया। ये पद प्रतिनियुक्ति और संविदा के आधार पर भरे जाने थे। पर, जीओ में सभी पदों के लिए वेतनमान तय कर दिया गया। जीओ में यह भी लिखा गया कि इन वेतनमान पर कार्यरत कर्मचारियों को समय-समय पर डीए समेत बाकी भत्ते भी मिलेंगे। ऐसे में एक कर्मचारी को 35 से 40 हजार रुपये मिलने थे, लेकिन, मानदेय के रूप में महज 10 से 12 हजार रुपये ही दिए जाने लगे। इस पर सात कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में अपील दायर कर दी। जून 2013 को सिंगल बैंच ने उनके पक्ष में फैसला दिया। इसके बाद शिक्षा विभाग डबल बैंच में पुनर्विचार के लिए गया तो 2016 में वहां भी हार गया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी इस आदेश को सही ठहरा दिया।

Facebook Comments

Random Posts