सरकार की गलत नीतियों के कारण सुसाइड कर रहे किसान? पढ़िए


सरकार की गलत नीतियों के कारण सुसाइड कर रहे किसान
उत्तराखंड मैं किसान आत्महत्या कर रहे हैं ?लेकिन राज्य सरकार किसानों की मौत को लेकर गंभीर नहीं दिख रही है ?इसी महीने मैं दूसरा मामला है किसानों की आत्महत्या को लेकर ? पूर्व मंत्री तिलकराज बेहड़ ने कहा कि बाजपुर के ग्राम बांसखेड़ी में किसान की आत्महत्या के मामले पर जिला प्रशासन के अधिकारी शासन को गुमराह करने का कार्य कर रहे हैं। अफसरों की संवेदन शून्यता का आलम यह है कि उन्होंने घटनास्थल तक पर जाने की जहमत नहीं उठाई। कहा कि किसानों की आत्महत्या के लिए प्रदेश सरकार जिम्मेदार है। कांग्रेस इस मामले को लेकर आंदोलन करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार किसान का कर्ज चुकता करे और मृतक की पत्नी नीलम सरना को नौकरी दे। बेहड़ ने ऐलान किया कि किसान के परिजनों को कांग्रेस डेढ़ लाख रुपये सहायता देगी।
श्री बेहड़ गुरुवार को ग्राम बांसखेड़ी पहुंचे और मृतक किसान बलविंदर सिंह के परिजनों से मिल कर उन्हें ढांढस बंधाया। उन्होंने कहा कि किसान बलविंदर सिंह पर 22 लाख कर्ज है। सरकार को कम से कम 25 लाख रुपये मुआवजा देना चाहिए। कहा कि किसान की पत्नी को सरकारी नौकरी दी जाए। कहा कि किसान बलविंदर की आत्महत्या के मामले को छिपाने के लिए अफसर कोशिश कर रहे हैं तथा उसे हत्या का रूप देने का प्रयास कर रहे हैं। यह बेहद शर्मनाक बात है। किसान के सुसाइड की खबर मिलने के बाद भी डीएम और एसएसपी ने मौके पर जाने तक की जरूरत नहीं समझी। सरकार के प्रतिनिधियों की यह संवेदनहीनता हैरान करने वाली है। उन्होंने कहा कि खटीमा में भी किसान की आत्महत्या की खबर पर डीएम व एसएसपी नहीं गए थे। कहा कि जिस प्रदेश का किसान आत्महत्या कर रहा हो,

वह प्रदेश कैसे खुशहाल हो सकता है। पूर्व मंत्री श्री बेहड़ ने कहा कि किसान ने बैंक से मिले नोटिस के बाद ही जहर खाकर आत्महत्या की। कहा कि प्रशासन की करतूत शर्मनाक करने वाली है। कहा कि किसानों की मौत के लिए भाजपा सरकार की गलत नीतियां जिम्मेदार हैं। कहा कि प्रदेश का किसान सरकारी कर्ज में डूबा हुआ है। भाजपा ने चुनाव से पहले सरकार बनने पर कर्जमाफी का सब्ज बाग दिखाया था, लेकिन सरकार बनने के बाद भाजपा अपने वादे से मुकर गई। उन्होंने ऐलान किया कि कांग्रेस मृतक के किसान के परिजनों के लिए डेढ़ लाख रुपये की सहायता करेगी। उन्होंने कहा कि किसानों की मौत के मामले में कांग्रेस बड़ा आंदोलन करेगी।
प्रदेश में लगातार कर रहे किसानों की आत्महत्या के मामले में सरकार ने बैंकों को जिम्मेदार ठहराया है। प्रदेश के कृषि मंत्री सुबोध उनियाल का कहना है कि प्रदेश में बैंकों के कर्ज में डूबे किसानों द्वारा की जा रही आत्महत्या के लिए ऋण दे रहे बैंक जिम्मेदार हैं। उनका कहना है कि मानकों के अनुरूप बैंक किसानों को ऋण नहीं दे रहे हैं। जिससे किसानों को दिक्कत उठानी पड़ती हैं। उन्होंने कहा कि यदि बैंक ऋण देने के लिए मानक बनाएं तो ऐसे हादसों को रोका जा सकता है। कृषि मंत्री ने कहा कि बैंकों द्वारा डिफाल्टरों को भी बिना जांच पड़ताल किए ऋण दे दिया जाता है। उन्होंने कहा कि किसानों की आत्महत्याओं के मामले की जांच की जाएगी साथ ही बैंकों की भी जांच कराने के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखकर पूरे मामले से अवगत कराया जाएगा। बाजपुर के ग्राम बांसखेड़ी में कर्ज में डूबे किसान की आत्महत्या के मामले में जिलाधिकारी डा. नीरज खैरवाल ने एसएसपी को निर्देश दिए हैं कि इंस्पेक्टर स्तर के किसी अधिकारी से भूमि विवाद, गृह क्लेश अथवा अन्य कारणों की जांच कराई जाए। डीएम ने कहा कि मौके से कोई सुसाइड नोट न मिलना मृत्यु के कारणों को संदिग्ध बनाता है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद कार्यवाही की जाएगी। उधर, बाजपुर के एसडीएम पूरन सिंह राणा ने अपनी जांच रिपोर्ट में ग्रामीणों का हवाला देते हुए लिखा है कि किसान ने विभिन्न बैंकिंग संस्थानों से कृषि कार्य के लिए ऋण ले रखा था। ऋण न चुका पाने के कारण अत्याधिक तनाव में होने के कारण किसान बलविंदर सिंह ने सल्फास खाकर आत्महत्या की है।
गौरतलब है कि बाजपुर के ग्राम बांसखेड़ी में गत दिवस कर्ज में डूबे 38 वर्षीय किसान बलविंदर सिंह पुत्र मलूक सिंह ने सल्फास खा ली, जिसे रुद्रपुर के बठला अस्पताल में लाया गया, जहां डाक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया था। बलविंदर सिंह को पंजाब नेशनल बैंक ने ऋण न चुकाने की दिशा में पंजीकृत नोटिस भेज कर आरसी काटने की चेतावनी दी थी। साथ ही चेताया था कि इससे किसान को आर्थिक एवं सामाजिक प्रतिष्ठा के संकट का सामना करना पड़ेगा। नोटिस में 749896 रुपये एवं ब्याज का भुगतान करने की अंतिम 30 जून 2017 दर्शायी गई थी। बलविंदर सिंह इस नोटिस के बाद से खासा परेशान था। युवा किसान के आत्महत्या करने की खबर से लोग उत्तेजित हो गए थे। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था।
उधर, इस मामले में जिलाधिकारी डा. नीरज खैरवाल ने एसएसपी को निर्देश दिए हैं कि इंस्पेक्टर स्तर के किसी अधिकारी से भूमि विवाद, गृह क्लेश अथवा अन्य कारणों की जांच कराई जाए। डीएम ने कहा कि मौके से कोई सुसाइड नोट न मिलना मृत्यु के कारणों को संदिग्ध बनाता है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद कार्यवाही की जाएगी।
वहीं बाजपुर के एसडीएम पूरन सिंह राणा ने अपनी जांच रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा है कि किसान ने विभिन्न बैंकिंग संस्थानों से कृषि कार्य के लिए ऋण ले रखा था। स्थानीय नागरिकों ने यह भी अवगत कराया कि ऋण न चुका पाने के कारण अत्याधिक तनाव में होने के कारण किसान बलविंदर सिंह ने सल्फास खाकर आत्महत्या की है। एसडीएम की रिपोर्ट में कहा गया है कि बलविंदर सिंह तीन भाई थे। बड़े भाई कुलदीप सिंह अपने मां बाप के साथ ग्राम बेरिया दौलत में निवास कर रहा है, जबकि दूसरा भाई माडू सिंह की पूर्व में ट्रेन से कट कर मौत हो चुकी है। मृतक बलविंदर सिंह के परिवार में उसकी पत्नी नीलम सरना व 14 वर्षीय बेटी पायल तथा चार वर्षीय बेटा प्रभजोत है। यह भी बताया गया कि बलविंदर का गांव में पक्का मकान है और वह बांसखेड़ी में किराने की दुकान करता था। एसडीएम की रिपोर्ट में कहा गया है कि मौके पर कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। मौत का कारण स्पष्ट न होने के कारण शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है।
क्षेत्रीय सांसद भगत सिंह कोश्यारी ने कहा कि बाजपुर में किसान के आत्महत्या करने के प्रकरण पर वह डीएम से पूरी जानकारी लेंगे। उन्होंने कहा कि पूर्व की काँग्रेस सरकार की गलत नीतियों के कारण किसान आत्महत्या कर रहे हैं। उनका आरोप है कि काँग्रेस सरकार के गलत कर्मों की वजह से आज किसान आत्महत्या करने को मजबूर हो रहे हैं। सांसद ने कहा कि केंद्र सरकार और राज्य सरकार ने कभी भी किसानों के कर्ज माफी का वायदा नहीं किया था। कहा कि सरकार किसानों को तमाम सुविधाएं देकर उनके विकास की योजनाएं लागू कर रही है। सांसद ने कहा कि वह सरकार से मृतक के परिजनों को मुआवजा दिलाने की बात करेंगे।
शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने बाजपुर के मृतक किसान बलविंदर सिंह के परिजनों से दूरभाष पर बात करके घटना पर दुख जताया तथा परिजनों को सांत्वना दी। उन्होंने कहा कि दुख की इस घड़ी में वह परिवार के साथ हैं।
जिले में कर्ज के बोझ के तले दबे अन्नदाता लगातार अपनी जान देने को मजबूर है। कर्ज न चुका पाने के कारण जिले में किसान की मौत का यह तीसरा मामला है। इससे पहले खटीमा के एक किसान ने आत्महत्या कर ली थी जबकि नानकमत्ता क्षेत्र में बैंक का नोटिस मिलने के बाद सदमे में किसान की मौत हो चुकी है। हालांकि शासन स्तर पर अभी तक कर्जदार किसानों की मौत रोकने के लिए अभी कोई कारगर कदम नहीं उठाए गए हैं। प्रदेश सरकार ने यह साफ कर दिया है कि सरकार कर्ज माफ करने की स्थिति में नहीं है।

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