बाबू से लेकर बड़े अफसर तक नपेंगे बड़े घोटाले में…

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मंडलायुक्त की सिफारिश के बाद यदि शासन ने बैक डेट में भूमि उपयोग बदलने की जांच कराई तो बाबू से लेकर अफसर तक नप जाएंगे। जिन किसानों ने फर्जी तरीके से कृषि भूमि को अकृषक कराकर एनएचआई से दस गुना मुआवजा लिया है उनसे रिकवरी भी हो सकती है। कमिश्नर की सख्ती से अफसरों, कर्मचारियों और माफियाओं में हडकंप मच गया है। यह घपला सिर्फ 118 करोड़ का नहीं, बल्कि गहराई से जांच हो तो पांच सौ करोड़ तक पहुंच सकता है।  गौरतलब है कि जिले में एनएच 74 के चैड़ीकरण का कार्य चल रहा है। नियमानुसार एनएच की जद में आ रही जमीनों का नोटिफिकेशन कराया गया। उस वक्त जिन जमीनों पर कृषि हो रही थी, उन्हें कृषि भूमि नोटिफिकेशन में दर्शाया गया था। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही एक सिंडीकेट सक्रिय हो गया। इस सिंडीकेट में नेता, अफसर, बाबू और माफियाओं की चैकड़ी ने बैक डेट में भूमि की 143 करानी शुरू कर दी। इस खेल में छोटे कर्मचारियों से लेकर बड़े अफसरों तक की सांठगांठ थी।

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