गैरसैंण को राजधनी बनाये जाने के लिए अनशन

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उत्तराखंड महिला मंच एवं स्वराज अभियान की जिला संयोजक निर्मला बिष्ट ने कहा कि आज सरकार के द्वारा जिस प्रकार से गैरसैंण भराडीसैंण में दो दिन का विधानसभा सत्र संचालित किया जा रहा है और इस सत्र में सरकार को प्रदेश की स्थायी राजधनी गैरसैंण की घोषणा करनी चाहिए और यदि सरकार ने ऐसा नहीं किया तो आर-पार की लड़ाई लड़ी जायेगी और फिर से सड़कों पर उतरकर जनांदोलन किया जायेगा। वहीं कल से शहीद स्थल पर गैरसैंण को प्रदेश की स्थाई राजधानी बनाये जाने की मांग को लेकर अनशन आरंभ किया जायेगा।

यहां शहीद स्थल कचहरी में पत्रकारों से रूबरू होते हुए उन्होंने कहा कि उत्तराखंड महिला मंच और स्वराज अभियान एक लम्बे समय से गैरसैंण राजधनी, आपदा घोटाले की सीबीआई जांच और शिक्षा सुधारे व शिक्षा के नाम पर जारी लूट को रोकने के लिए कड़े कानून लाए जाने की मांग पर निरंतर संघर्षरत है । उनका कहना है कि इन्हीं तीनों मांगों पर गैरसैंण में बुलाए गए सत्र में यदि कांग्रेस विधेयक नहीं लाती है और इन तीनों मांगों पर भाजपा भी अपनी पार्टी की और से कोई बिल नहीं लाती है तो स्पष्ट है कि इन तीनों ही मुद्दों पर इनकी मिली भगत है और राजधानी का सवाल हो या आपदा घोटाले की सीबीआई हो शिक्षा के सवाल पर यह दोनों ही पार्टियां और सरकार लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ कर रही है ।

उनका कहना है कि उत्तराखंड महिला मंच और स्वराज अभियान ने निर्णय लिया है कि अंतिम दबाब बनाने के लिए मैं और मेरे साथ ही महिला मंच व स्वराज अभियान के कार्यकर्ता विधानसभा सत्र शुरू होने से लेकर विधानसभा सत्र खत्म होने तक यहीं शहीद स्थल पर अनशन पर बैठेंगे । उनका कहना है कि प्रदेश की सरकार यदि गैरसैण को स्थायी राजधानी सरकार घोषित करती है व अन्य दोनो मांगों पर कोई भी सकारात्मक निर्णय ले लेती है तो उसका स्वागत किया जायेगा, परंतु यदि ये कोई निर्णय अब भी नहीं लेते है और भाजपा भी बयानबाजियां न करके स्पष्ट रूप से कोई बिल इन बिंदुओं पर सदन पटल पर नहीं लाती है तो संघर्ष को तेज किया जायेगा, उनका कहना है कि जिसकी अगली रणनीति इसी अनशन के दौरान तय की जाऐगी ।

उनका कहना है कि गैरसंैण को प्रदेश की स्थायी राजधनी के लिए जनांदोलन की शुरुआत राज्य गठन से ठीक पहले 24 सितम्बर 2000 को महिला मंच ने दस हजार लोगों की विशाल रैली गैरसैंण में निकाल कर और उसके बाद 2 अक्टूबर को उत्तराखंड बंद रख कर की थी । उनका कहना है कि वर्ष 2004 में 87 दिन तक आमरण अनशन पर एक बाद एक 14 महिलाऐं बैठी और 15 दिन की पदयात्रा गैरसैंण से दून तक निकाली गई थी और सचिवालय पर तीन दिवसीय ध्रना दिया गया था परन्तु दीक्षित आयोग के बहाने कांग्रेस की हो या भाजपा की दोनों ही सरकारों ने आज तक मुद्दे को लटकाया है।
उनका कहना है कि परन्तु अब दोनों बयान बहादुर लोगों को आज तक बयानों से बहलाने की कोशिश में लगे हुए हैं, यदि यही रवैया रहा तो दोनों को सबक सिखाना होगा जो जनमुद्दों पर सिर्फ बयानबाजी करते हैं काम कुछ भी नही आगे यहां उत्तराखंड के अन्य जिलों में स्वराज अभियान प्रदेश अध्यक्ष कमला पंत के नेतृत्व में पूरे उत्तराखंड में इन तीनों मुद्दों पर तीव्र संघर्ष का कार्यक्रम तय किया जायेगा और इसके लिए रणनीति तैयार की जायेगी।

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