हरिद्वार के 125 होटलों पर लटकी एनजीटी की तलवार

(अनूप कुमार)
गंगा को मैली कर रहे धर्मनगरी के 20 या 20 से अधिक कमरे वाले सवा सौ होटलों पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की तलवार लटक गई है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) के क्षेत्रीय कार्यालय ने सर्वे के बाद रिपोर्ट तैयार कर एनजीटी को सौंप दी है।

नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत गंगा को प्रदूषण रहित करने को एनजीटी ने धर्मनगरी में 20 व इससे अधिक कमरे वाले होटलों को अपना निजी एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) लगाने के आदेश दिए थे। होटलों को क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कार्यालय में भी पंजीकरण कराना था।

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इसी क्रम में पीसीबी ने पिछले दिनों शहर के पांच होटलों को नोटिस जारी किया था, जिसमें से चोटीवाला और शिवमूर्ति को 2 अगस्त को सील कर दिया था, जबकि राज डीलक्स, सचिन इंटरनेशनल और त्रिशूल को हाईकोर्ट से राहत मिल गई थी। कोर्ट ने उन्हें 27 अगस्त तक एसटीपी लगाने का आदेश देते हुए सीलबंद की कार्रवाई से मुक्त कर दिया था। इन तीनों ही होटलों ने निर्धारित समय में अपने यहां एसटीपी लगा लिए, जिसकी रिपोर्ट पीसीबी ने एनजीटी को भेज दी है।

इधर, एनजीटी के आदेश पर पीसीबी ने सर्वे कर शहर के ऐसे 125 ऐसे होटलों की सूची तैयार की है जिनके यहां उत्सर्जित होने वाली गंदगी को साफ करने के लिए एसटीपी नहीं है। साथ ही यह ये होटल गंदगी को किसी न किसी तरीके से सीधे गंगा में डाल रहे हैं। पीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी अंकुर कंसल ने बताया कि पीसीबी ने रिपोर्ट एनजीटी को भेजी दी है।
धर्मशालाओं और आश्रमों पर भी होगी कार्रवाई
शहर में स्थित आश्रमों और धर्मशालाओं पर भी एनजीटी कार्रवाई की तैयारी में है। बताया जा रहा है कि यहां कई आश्रम और धर्मशालाएं ऐसी हैं जो किसी भी लिहाज से किसी फाइव स्टार होटल से कम नहीं है। कई आश्रमों और धर्मशालाओं में सौ-सौ कमरे तक हैं, इनमें से ज्यादातर गंगा किनारे स्थित हैं। आरोप है कि यह सभी अपनी गंदगी सीधे गंगा में डाल रहे हैं और अभी तक तमाम चेतावनी के बावजूद इन्होंने अपने यहां एसटीपी नहीं लगाए हैं।

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