हरीश रावत के दलित, ब्राह्मण और ठाकुर वोट बैंक पर भाजपा की तीखी सेंध !

0

(मनीष वर्मा, स्वत्रन्त्र पत्रकार )

उत्तराखंड के मौजूदा घटनाक्रम को देखा जाये तो भाजपा की इस घोषणा से की विधायको में से ही मुख्यमंत्री होगा और पांचों सांसदों में किसी को टिकट न मिलने के कारण 2 लोग पूरी ताकत से कांग्रस में सेंधमारी कर रहे हैं इनमे से एक है ठाकुर सतपाल महाराज और दूसरे हैं ब्राह्मण विजय बहुगुणा ।

गौरतलब है कि हरीश रावत इस चुनाव में उत्तराखंड में ब्राह्मण,ठाकुर व् दलित वोट बैंक का कार्ड खेलना चाहते थे और उन्हीने पूरी सेटिंग के साथ फील्डिंग भी जमा दी थी पर किशोर उपाध्याय और हरीश रावत की आपसी कलह ने इस फील्डिंग के खिलाड़ियों को आउट कर दिया और आउट होने की लाइन ऐसी लगी की सबसे बड़ा दलित कार्ड यशपाल आर्य भाजपा में चला गया फिर तो क्या था जब एक काबीना मंत्री और 40 साल से खेल रहा खिलाडी जाता है तो कइयों को साथ लेकर जाता है और ठीक ऐसा हुआ भी ।

कांग्रेस के 10 खिलाडी तो पहले ही जा चुके थे बाद में 2 बड़े झटके यशपाल आर्य और केदार सिंह रावत ने दिए तो अब क्या था ? जब ताश के पत्ते ढहते है तो धड़ाधड़ गिरते चले जाते हैं और 10 से 12 और 12 से ये कई गुणा होते जा रहे हैं उत्तराखंड एक छोटा सा तो प्रदेश है एक एक के कई कई मित्र व् चाहने वाले भी हैं सो कइयों को दायित्व व् दर्जा भी दिलवाया था सो लग गयी लाइन 5 साल दर्जा लेकर मजे किये हुए दर्जाधारियो व् पदाधिकारियों को भी साथ ले गए फिर ब्राह्मण नेताओ में सबसे पहले धीरेंद्र प्रताप व् विवेकानद खंडूरी (धीरेंद्र प्रताप तो राज्य आंदोलनकारी परिषद् के 5 साल अध्यक्ष रहे उनको लगा होगा की जिस समाजवादी पार्टी को वो 5 साल गालियां देते रहे ,कोसते रहे आंदोलनकारियों की सभा के हर भाषण में मुजफ्फरनगर काण्ड ,मसूरी गोली काण्ड, खटीमा गोली काण्ड ,कोटद्वार काण्ड ,श्रीयन्त्र टापू काण्ड की दुहाई देते रहे कि कही जनता उसका हिसाब न लगा ले इस लिए अपने आका विजय बहुगुणा के साथ हो लिये ) रही सही कसर दिग्गज ब्राह्मण नेता एन डी तिवारी के कांग्रस मोह-भंग से पूरी हो गयी व् सतपाल महाराज स्वयं पहले ही रावतों के वोट बैंक बटोर चुके हैं सहित कई अन्य दिग्गज नाम ,संतोष कश्यप जैसी कर्मठ महिलाएं भाजपा में शामिल होती चली गयी ।

यहाँ तक की बागियों ने तो हद ही कर दी की खुद हरीश रावत को महासचिव व् प्रवक्ता शिल्पी अरोड़ा ने चुनोती तक दे डाली साथ ही रुद्रप्रयाग से प्रदीप थपलियाल,देवप्रयाग से शूरवीर सजवाण,धर्मपुत व् रायपुर से रजनी रावत ,कैंट से नवीन बिष्ट,लक्ष्मण नेगी ,राजेंद्र धवन,राजपुर से टी सी भारती, अजय सोनकर ,धनोल्टी से मनमोहन सिंह मल्ल ,सहसपुर से आर्येन्द्र शर्मा,गदरपुर से जरनैल सिंह काली ,खटीमा से ललित सिंह ,भीमताल से राम सिंह कैड़ा और लाल कुआ से हरेंद्र सिंह बोरा निर्दलीय चुनौती दे रहे हैं धनोल्टी से तो कांग्रेस ने हद ही कर दी यू के डी पी से कभी के निष्काषित प्रीतम पंवार को समर्थन की चिट्ठी जारी कर दी यानि की हाई कमान को सूचना देना वाला कोई नही है यानि की आपने अपना दिमाग इस्तेमाल नहीं किया था यानि आप जज बनने के काबिल नहीं पहले तो आपने फांसी की सजा दे दी और फिर कह रहे हैं कि नही नही सजा इसको नहीं दूसरे को देनी थी ! आखिर ये क्या रणनीति एक दूसरे की राजनिति को खत्म करने की थी ? हरीश रावत का अंत तक किशोर को दौड़ाये रखना टिहरी ,ऋषिकेश ,और अब सहसपुर । किशोर न रहे घर के और न घाट के । बची खुची राजनीती अब बागियों ने समाप्त कर देनी है अरे हरीश रावत सहाब 70 सीटे तो आपके कहने से ही दी हैं हाई कमान राहुल जी ने फ़ेंक देते एक चुग्गा टिहरी का अध्यक्ष को । कम से कम इतना बबाल तो न होता । पीडीऍफ़ का इतना भी क्या की पार्टी ही तोड़ डाली उनकी वजह से उन्होंने क्या 5 साल मलाईदार मंत्रालय लेकर मजे नहीं किये हर बार सरकार गिराने की धमकी से अपने बड़े बड़े काम आपसे करवाये और आपने तो बेचारों के लिए आँखे तक फेर ली ! तो आप उनको इतना भाव क्यों दे रहे चुनाव में जब नहीं ज्वाइन कर रहे वो पार्टी तो जाने दो कम से कम अपने कुनबे को तो संभालो । और अब भी क्या कर लिया उन्होंने ? अपनी ही तो चला रहे हैं सो चलाने दो अगर जीत के आएंगे तो फिर कर लेना गठबंधन ।

यह सब देखकर पिछले चुनाव का “खंडूरी है जरुरी याद आ गया ” की भाजपा के चाहने वालो ने ही भाजपा को हरा दिया था क्योंकि उनको लगा था कि खंडूरी आ गए तो उनकी तो राजनीती समाप्त हो जायेगी , ऐसा ही कुछ इस बार कांग्रेस के जगह जगह दिख रहे वाल पेंटिंग में दिख रहा है ” 5 साल रावत सरकार ” यानि बाकि सब ब्राह्मण ,दलित ,मैदानी ,पंजाबी ,ईसाई
तो जैसे उत्तराखंड छोड़ के जा चुके हो सिर्फ रावत ही रहेंगे यहाँ । क्या ये चुनाव आयोग के जातिवाद के निर्देश का उल्लंघन नहीं ?

नहीं नहीं लोकतंत्र में यह नहीं होना चाइए ये गलत है कांग्रेस को अपना नारा और वाल पैंटिंग बदलनी चाइए सबको साथ लेकर चलना चाइए …नहीं तो भाजपा सेंध लगाती जायेगी ..लगाती जायेगी और कांग्रेस के खिलाड़ी खड़े खड़े देखते रह जायेंगे । क्योंकि निर्णय लेने वाली कोई कोर टीम तो है नहीं यहाँ ।

“यहाँ तो खाता न बही जो हरदा कहे वो सही ” सो अंतिम मैच किस किस के बीच होगा यह तो नाम वापसी के बाद 1 फरवरी को ही पता चलेगा पर फिलहाल लालबत्ती लेकर मजे ले चुके व् दर्जाधारियो की फ़ौज जो बागी हो रही है उस पर राहुल गांधी जी का देहरादून के होटल एकता में हुई तत्तकालीन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा की सम्मेलन व् बैठक याद आ गयी जिसमे उन्हीने कहा था कि ‘ या तो दायित्व ले लेना या टिकट ” यानि की कथनी और करनी एक होती तो आज इतना बबाल न होता और ये नौबत न आती की आज चंद 4 या 5 दर्जा धारियों व् प्रदेश कांग्रेस के बड़े पद वाले पदाधिकारियों को छोड़ कोई भी प्रचार प्रसार तो दूर इर्द गिर्द भी नहीं घूम रहा । कुछ ऐसे भी हैं जो प्रदेश उपाध्यक्ष भी प्रदेश महामंत्री भी मुख्यमंत्री के सलाहकार भी और और अब टिकट भी उनको ही । बेचारे बाकि तो झंडा-डंडा ,फ्लेक्स और और होर्डिंग लगा कर आपका प्रचार प्रसार ही करते रह गए और आपके सामने हाथ जोड़े बिना कुछ मांगे खड़े रहे की शायद आपको उनका कुछ पुराना किया धरा याद आ जायेगा पर आप तो सत्ता के नशे में चूर उनकी तरफ देख कर भी अनजान हो गए । कई बार एक चींटी भी हाथी को बचा लेती है जनाब और इस प्रदेश के चुनाव तो जुमलो, लेखों मीठी लच्छेदार बातों से और इज़्ज़त देकर जीते जाते हैं न की दावतों से । साहित्यकार ,चित्रकार ,मूर्तिकार ,पत्रकार हों या सम्मानित आमजन न तो कोई पैसो का भूखा होता है और न खाने का ईश्वर पूर्व से ही सबका प्रबंध करके भेजता है दुनिया में कोई किसी की किस्मत नहीं छीन सकता जनाब पर हाँ सब चाहते है इज़्ज़त और एक कुशल प्रशाशक जो आम जन को समझे । क्या इसलिए सेकंड लाइन लीडरशिप बनायीं जाती है पार्टी में ? बड़े शर्म की बात है शायद रावत जी और किशोर ” गांधी ” के सपनी पूरा करने की चाह में जल्दबाज़ी में चयन करने में फेल हो गए और अपात्रों को पात्र समझ लिया पर शायद गलती उनकी नहीं गलती उन अनपढ़ सलाहकारों की है जो उनको चारी तरफ से घेरकर उनके नाक ,कान या आँख बने उलटी सीधी सलाह दे रहे थे और कुछ तो अपनी चुनाव की तैयारी भी कर रहे थे जिससे की मुख्य कार्य डाइवर्ट हो रहा था । मै जनता हूँ की कांग्रेस पार्टी की सरकार इस समय ज्यादा प्रदेशो में नहीं है और शायद इस लिए पार्टी के पास फण्ड भी कम हो पर जितने आपने दर्जाधारी और दायित्वदारी बनाये यदि मलाई चाट चुके दर्जाधारी उस मलाई की जरा सी खुरचन लेकर 10 – 10 फ्लेक्स और 2 गाड़िया भी कांग्रेस कमिटी को दे तो प्रचार प्रसार की जबरदस्त लहर आ जाये और भाजपा द्वारा दिखाये जा रहे CM के स्टिंग ऑपरेशन का जवाब दे सके । बरहाल, शायद फ़िज़ा का रुख देख कर हवाएं शांत हो गयी हैं ।

उधर भाजपा ने अपने प्रत्याशियों के जो पिछले 5 वर्षो से तैयारी कर रहे थे, टिकट काट कर ,कांग्रेस के बागियों को टिकट दिए हैं तो वो भी अपनी पार्टी में एक बागियों की फ़ौज खड़ा कर चुकी है इनमे केदारनाथ से आशा नौटियाल,नरेंद्रनगर से ओम गोपाल रावत,रायपुर से महेंद्र सिंह नेगी ,धर्मपुर से नीरज सिंघल ,डीडी हाट से किशन भंडारी ,जसपुर से सीमा चौहान ,काशीपुर से राजीव अग्रवाल ,नैनीताल से हेम आर्य और कालाढूंगी से हरेंद्र धर्मवाल हैं ।

दोनों पार्टीयी के बागियों के आलावा कुछ अन्य दमदार स्वस्थ छवि के प्रत्याशी अनूप नौटियाल ,माँ प्रभा किरन ,संजय श्रीवास्तब ,जय प्रकाश उपाध्याय यू के डी जैसे प्रत्याशी भी कई स्थानों पर पार्टीयो के समीकरण खराब करेंगे

देखना यह है कि दोनों पार्टीयो में कौन किसको कितना व् किस कारण और क्या कहकर किस सांत्वना से संभाल पाता है और बागी फ़िज़ा का रुख देखकर मानेंगे या नहीं ?

और बाकि आप सब समझदार हैं कम लिखे को अधिक समझे ….युद्ध अभी शेष है ।…….

Facebook Comments

Random Posts