हरीश रावत ने ऊधमसिंह नगर से फूंका चुनावी बिगुल

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उत्तराखंड में चुनाव 2017 के चलते चुनावी सरगरमिंया तेज हो गई हैं एक ओर जहां टिकट को लेकर खींचातानी जारी है वहीं दावेदार अपनी सीटों से अपना दावा ठोक रहे हैं इन सबके बीच प्रदेश के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी भाजपा के सबसे बड़े गढ़ ऊधमसिंह नगर जिले से चुनावी शंखनाद बजा दिया है और चुनाव का आगाज कर दिया है।

भाजपा पिछले कुछ महीनों से कुमाऊं की सबसे महत्वपूर्ण सीट हल्द्वानी में कांग्रेस की घेराबंदी कर रही है। उसकी रणनीति कांग्रेस के बड़े नेताओं को उनके घर में ही उलझाए रखने की है ताकि वह अन्य क्षेत्रों पर अपना फोकस न कर पाएं। उधर, इससे एक कदम आगे बढ़ते हुए कांग्रेस ने ऊधमसिंह नगर से चुनावी बिगुल फूंक दिया। ऊधमसिंह नगर जिले को चुनने के पीछे सबसे बड़ी वजह यह है कि यहां की नौ विधानसभा सीटों में आठ (शैलेंद्र मोहन और विजय बहुगुणा को लेकर) भाजपा के पास हैं। सिर्फ राजस्व मंत्री यशपाल आर्य की सीट बाजपुर ही कांग्रेस के पास है।

मुख्यमंत्री हरीश रावत को यह अच्छी तरह पता है कि यदि कुमाऊं के इस जिले में कांग्रेस के पक्ष में हवा बन गई तो आसपास के जिलों में माहौल अपने आप बन जाएगा। यही वजह है कि वह यहां पूरी तैयारी से पहुंचे। पार्टी के पदाधिकारियों को भी भीड़ जुटाने के पहले ही निर्देश दे दिए गए थे। सभा में उसका असर भी दिखा। पूरा ट्रांजिट कैंप मैदान भीड़ से ठसाठस भरा पड़ा था।

राज बब्बर ने भी अपने निशाने पर इस जिले में भाजपा के सबसे बड़े कद के नेता विजय बहुगुणा को रखा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में विजय बहुगुणा का बड़ा सम्मान था। उनकी हर जिद को पूरी की गई, लेकिन अब वह भाजपा में जा चुके हैं, उन्हें जल्द ही दोनों पार्टियों के बीच फर्क समझ में आ जाएगा। गुटबाजी कर रहे लोगों को भी राज बब्बर ने मंच से स्पष्ट संकेत दिए कि यहां इसकी कोई जगह नहीं है। कांग्रेस में सिर्फ एक ही गुट है वह है राहुल और सोनिया का, दूसरे की कोई गुंजाइश नहीं।

इंदिरा हृदयेश भी लंबे समय बाद अपने क्षेत्र के बाहर किसी रैली में शामिल होने पहुंचीं। उन्होंने भी स्थानीय मुद्दों की बजाय सीधे केंद्र सरकार पर हमला बोला। मुद्दा बनाया कालेधन को, कहा- भाजपा ने वादा किया था कि कालाधन वापस लाकर सभी भारतीयों के खाते में जमा किया जाएगा, लेकिन वह आज तक पूरा नहीं हो सका।

सीएम ने अपने संबोधन में यह संदेश देने की कोशिश की कि उनके एजेंडे में सभी जाति-धर्म के लोगों का विकास शामिल है। उन्होंने 130 उर्दू शिक्षकों की नियुक्ति की बात कही तो 30-30 गुरुमुखी और बंगाली शिक्षकों को भी तैनाती देने की घोषणा की। अब देखना यह है कि उनकी यह कोशिश क्या रंग लाती है।

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