पकड़ा गया फर्जी प्रधानाध्यापक, कहां? पढ़िए खबर

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उत्तराखंड में शिक्षा विभाग लगातार विवादों में विवादित रहते हुए प्याज के छिलके की तरह परत दर परत पोल खुलनी शुरु हो गई है टिहरी में 25 सालों से सरकारी वेतन पा रहा एक फर्जी प्रधानाअध्यापक पाया गया है, न जाने पूरे शिक्षा विभाग में कितने फर्जी शिक्षक भरे हुए हैं, इस पर सवाल खड़ा हो चला है कि इन शिक्षकों की डिग्रियों की जांच की आवश्यकता है। शिक्षा विभाग पर बट्टा लगाने वाले यह अधिकारी अपनी नौकरी पाने के लिए तो फर्जी और झूठ का सहारा लेकर नौकरी हथिया रहे हैं लेकिन सरकारी खजाने को चोट और शिक्षा के गिरते हुए स्तर पर भी कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रहे हैं।

उत्तराखंड में एक ऐसा फर्जी प्रधानाध्यापक पकड़ा गया है, जो पिछले 25 सालों से स्कूल में अपनी सेवाएं दे रहा था और सरकारी वेतन पा रहा था। जांच में उसके दस्तावेज फर्जी पाए जाने पर शिक्षा विभाग के होश उड़ गए हैं। यह मामला टिहरी गढ़वाल स्थित एक सरकारी स्कूल से सामने आया है जहां उक्त शिक्षक पिछले 25 साल से अपनी सेवाएं दे रहा था। उक्त प्रधानाध्यापक को सेवा से बर्खास्त करते हुए रिपोर्ट दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।

उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल स्थित थौलधार विकासखंड के राजकीय प्राथमिक विद्यालय मंजकोट (नगुण) में नियुक्ति प्रधानाध्यापक जयप्रकाश यादव के योग्यता प्रमाण पत्रों पर संदेह होने पर विभागीय जांच में जिला शिक्षाधिकारी प्राथमिक डा. अशोक कुमार गुसांई ने हाईस्कूल अंकपत्र, प्रमाण पत्र व बीटीसी अंक पत्र व प्रमाण पत्र फर्जी पाए जिसके आधार पर अध्यापक को सेवा से बर्खास्त करते हुए रिपोर्ट दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।

जांच में पाया गया कि अध्यापक द्वारा 12 दिसंबर 1990 से सहायक अध्यापक प्राथमिक शिक्षक के पद पर नियुक्ति पाने के बाद प्रमोशन भी पा चुका था। मंडाखेरी, पोआ कोलासागर जिला बिजनौर निवासी है एवं 26 अक्टूबर 2015 से विद्यालय से अनुपस्थित है।

जांच अधिकारी जिला शिक्षाधिकारी बेसिक डा. अशोक कुमार गुसांई ने उन्हें सेवा से बर्खास्त करते हुए आपराधिक मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए। उप शिक्षाधिकारी विनीता कठैत ने 6 अक्टूबर को राजस्व उप निरीक्षक चोकी लवाणी तहसील कंडीसौड में उक्त प्रधानाध्यापक के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया है।

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