हाई कोर्ट: अब आदमखोर घोषित नहीं होंगे जंगली जानवर

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नैनीताल हाईकोर्ट ने पर्यावरण एवं वन्य जीव संरक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क समेत राज्य के सभी राष्ट्रीय पार्कों के दस किलोमीटर दायरे को ईको-सेंसटिव जोन घोषित करने के आदेश केंद्र सरकार को दिए हैं। साथ ही कोर्ट ने जंगली जानवरों जैसे टाइगर और लैपर्ड को आदमखोर न घोषित करने के सख्त निर्देश दिए हैं।
कोर्ट ने मृत जंगली जानवरों की फोटोग्राफ प्रिंट व इलेक्ट्रानिक मीडिया को उपलब्ध नहीं कराने के भी सख्त निर्देश दिए हैं। खंडपीठ ने साफ किया है कि किसी भी जंगली जानवर को बहुत आवश्यक होने पर मुख्य सचिव की कमेटी के समक्ष मामला प्रस्तुत करने के बाद ही आदमखोर घोषित करना होगा।
अब तक प्रमुख वन संरक्षक वन्य जीव, प्रभागीय वनाधिकारी की रिपोर्ट पर वन्यजीवों को आदमखोर घोषित किया जाता था। कोर्ट ने जानवरों को रेल हादसों से बचाने के लिए राजाजी नेशनल पार्क के भीतर रेलवे ट्रैक पर विद्युत व्यवस्था करने के निर्देश रेलवे को दिए हैं। साथ ही वन कानून में संशोधन कर शिकारियों के लिए कठोर दंड जैसे आजीवन कारावास का प्रावधान करने का आदेश पारित किया है।
पिछले साल राज्य के जंगलों में भीषण आग धधक उठी थी। आग बुझाने के लिए हेलीकॉप्टर का सहारा लिया गया था। विकराल हुई दावानल से आसमान धुएं से भर गया था। हाई कोर्ट ने इस मामले का स्वतरू संज्ञान लिया था और साथ ही केंद्र, राज्य सरकार से जवाब दाखिल करने को कहा था।
पिछले दिनों वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा व न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ ने इन दी मैटर ऑफ दी प्रोटेक्शन ऑफ फोरेस्ट इन्वायरमेंट, वाइल्ड लाइफ संबंधी इस जनहित याचिका पर सुनवाई पूरी की। फैसले में अदालत ने तमाम अहम बिंदुओं पर दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
खंडपीठ ने वनों को आग से बचाने के लिए गर्मियों से पहले दस हजार अग्नि सुरक्षा कर्मियों की नियुक्ति करने तथा उचित मात्रा में पानी का इंतजाम करने को कहा है। साथ ही वनों को आग से बचानेके लिए सरकार को समुचित धन की व्यवस्था करने को कहा।

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