सदन में भी हंगामा, त्रिवेंद्र सरकार की हो सकती है किरकिरी, पढिए क्यों

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 नैनीताल/देहरादून। उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय ने प्रदेश में निर्बाध रुप से जारी अवैध खनन पर सख्त रुप अखतियार करते हुए खनन पर अगले चार माह तक पूर्णतया रोक लगा दी है । अवैध खनन का मामला मंगलवार को विधानसभा सत्र में भी गूंजा।

सदन में दोनों दलों के नेताओं ने इशारों -इशारों में एक दूसरे पर छींटाकस्सी की। अवैध खनन प्रदेश में हमेशा से ज्वलंत मुद्दा है। इस पर सत्ता पक्ष के नेताओं का हमेशा से सिक्का चल है। सरकार भले ही किसी भी पार्टी की क्यों न हों, लेकिन अवैध खनन से मोह सभी का रहा है। इस सफेद सोने को सभी ने तरजीह दी है।
उच्च न्यायालय ने महानिदेशक फारेस्ट रिसर्च इंस्टिट्यूट देहरादून, निदेशक वाडिया इंस्टिट्यूट देहरादून और महानिदेशक जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया देहरादून समेत कुल तीन सदस्यीय समिति बनाकर खनन जारी रखने या राज्य में इसे रोकने को लेकर जांच रिपोर्ट चार माह में न्यायालय में पेश करने को कहा है । न्यायालय ने रिपोर्ट के आने तक नदियों के मुहानों, जंगल क्षेत्र, प्रवाह और धाराओं से किसी भी प्रकार के खनन पर रोक लगा दी है । वरिष्ठ न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति सुधांशू धूलिया की खण्डपीठ ने मंगलवार को सुरक्षित रखे अपने इस आदेश को सुनाया।

कोर्ट के बार-बार निर्देश के बाद भी अवैध खनन रुकने का नाम नहीं ले रहा है। जानकारों की माने तो तत्कालीन कांग्रेस को डूबाने मंे अवैध खनन का बहुत बडा हाथ रहा है। अगर त्रिवेन्द्र सरकार ने इसे गंभीरता से लेते हुए उचित कदम नहीं उठाए तो भाजपा को दुष्परिणाम भुगतने पडेंगे।

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