अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट का दावा, पाकिस्तान के मदरसे बन रहे हैं आतंक की नर्सरी

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एक ओर जहां पाकिस्तान स्वयं को आतंकवाद से पीड़ित बताता है, वहीं उसकी कथनी और करनी में फर्क भी साफ नजर आता है। इस साल की शुरुआत में ही उसने पठानकोट का जख्म दिया और ठीक आठ महीने बाद उडी में सेना मुख्यालय पर फिदायीन हमला कराया। यूएन जनरल असेंबली में पाक पीएम नवाज शरीफ को बुरहान वानी शहीद नजर आता है। उसके सम्मान में वो कसीदे पढ़ते हैं। लेकिन ब्रसेल्स की ख्याति प्राप्त संस्था क्राइसिस ग्रुप के मुताबिक पाकिस्तान के हुक्मरान सरासर झूठ बोलते हैं। पाकिस्तान आतंक की नर्सरी बन चुका है।

पाकिस्तान का पंजाब बन रहा जिहादियों के लिए हॉर्टलैंड

क्राइसिस ग्रुप के मुताबिक पाकिस्तान का पंजाब प्रांत जिहादियों का हॉर्टलैंड बन गया है। पाकिस्तान के मदरसों में धार्मिक अतिवाद की शिक्षा दी जाती है। पाक में संचालित मदरसे आतंक की नर्सरी बन चुके हैं। इस रिपोर्ट की प्रासंगिकता इस लिए भी बढ़ जाती है क्योंकि पीएम मोदी खुल कर ये कहते हैं कि धार्मिक अतिवाद से बचने के लिए पाक के हुक्मरानों ने अगर कुछ नहीं किया तो हालात बेहद खराब हो जाएंगे।

राजनीतिक दलों की नाकामी से जैश को फायदा

रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में राजनीतिक दलों की नाकामी की वजह से आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद अपनी ताकत बढ़ा रहा है। जैश के आका पाकिस्तान सरकार के समानांतर एक व्यवस्था चला रहे हैं। जैश शैक्षणिक संस्थानों के जरिए पाकिस्तान के मासूम लड़कों के दिल और दिमाग में नफरत का जहर घोल रहा है।

सिंध, पंजाब और बलूचिस्तान सबसे बड़े केंद्र

क्राइसिस ग्रुप के मुताबिक दक्षिण पंजाब का राजनपुरस सिंध का काश्मोर और बलूचिस्तान में डेरा बुगती खान जिहादियों के लिए शरणगाह बन चुके हैं। देवबंदी विचारधारा के मदरसों में जिहाद के बारे में ही सिर्फ पढ़ाया जाता है। इन मदरसों में तालिबान के समर्थन और भारत के खिलाफ एक सूत्री नीति पर काम किया जा रहा है। पाकिस्तान की जमीन पर संचालित मदरसों में भारत के खिलाफ नफरत के बीज बोए जा रहे हैं।

पाकिस्तानी सरकार नाकाम

हाल ही में पाकिस्तान के एक डिप्लोमेट ने नई दिल्ली में बोलते हुए कहा था कि देवबंदियों द्वारा आयोजित सेमिनार में जिस तरह की बातें की जा रही हैं उससे पाकिस्तान के लड़कों में कट्टरता को बढ़ावा मिल रहा है। पाकिस्तान सरकार के सामने ये एक बड़ी समस्या है। इन सब तत्वों से निपटने की कोशिश की जा रही है। लेकिन पुख्ता तौर पर इससे निपटने में नाकामी ही हाथ लग रही है।

साभारः दैनिक जागरण

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