सहेजना होगा कुमाऊंनी भाषा कोः कुंजवाल

कुमाऊंनी भाषा सम्मेलन के अंतिम दिन के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और जागेश्वर के विधायक गोविंद सिंह कुंजवाल ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि समिति द्वारा भाषा के संवर्धन के लिए किए जा रहे प्रयासों के दूरगामी परिणाम सामने आएंगे। कुमाऊंनी भाषा को सहेज कर रखने के लिए हमें हरसंभव प्रयास करने होंगे। तभी इसके संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयास सार्थक साबित हो सकेंगे। कुमाऊंनी भाषा को पाठ्यक्रम में शामिल किया जा सके। इसके लिए भी हरसंभव कोशिश की जाएगी।

उन्होंने बताया कि अब लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में कुमाऊंनी और गढ़वाली भाषा संस्कृति से जुड़े सवाल भी पूछे जाएंगे। सायंकालीन सत्र की अध्यक्षता साहित्यकार घनानंद पांडे ने की। इस सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में वित्त मंत्री प्रकाश पंत शामिल रहे। उन्होंने भी अपने संबोधन में कुमाऊंनी भाषा के प्रचार प्रसार के लिए गंभीरता से प्रयास करने की बात कही। पूर्व विधायक मनोज तिवारी ने कहा कि 1998 के एक सर्वे के अनुसार छब्बीस लाख साठ हजार लोग कुमाऊंनी भाषा बोलते हैं। जिससे स्पष्ट होता है कि कुमाऊंनी भी स्वयं में एक समृद्ध भाषा के रूप में स्थापित है। जिला पंचायत अध्यक्ष पार्वती मेहरा ने भी कुमाऊंनी भाषा बोलने की बात पर जोर दिया।

इस मौके पर दामोदर जोशी, शिवचरण पांडे, त्रिभुवन गिरि, मोहन जोशी, तारा दत्त तिवारी, महेंद्र ठकुराड़ी, देवकीनंदन, दीपा गोवाड़ी, विनोद पंत, जुगल किशोर पेटशाली, डा. हेमचंद्र दुबे, मोहन कार्की, डा. हयात रावत, प्रकाश चंद्र फुलोरिया, प्रीति आर्या, कृपाल सिंह, जमन सिंह बिष्ट, रमेश बहुगुणा, रेखा आर्या, नवीन जोशी, सुदर्शन सिंह समेत अनेक लोग मौजूद रहे।

 

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