गैरसैंण पर अभी सस्पेंस ही रहने दोः त्रिवेंद्र सिंह रावत

चुनाव के समय उठने वाला और फिर अगले तीन-चार साल तक ठंडे बस्ते में चले जाने वाला गैरसैंण का मुद्दा नई सरकार में समय से बहुत पहले उठ गया है. त्रिवेंद्र सरकार के शीत सत्र गैरसैंण में करवाने के फैसले के बाद यह मामला पहले ही गर्म था अब मुख्यमंत्री ने स्थायी राजधानी के मुद्दे को सस्पेंस में रहने देने की बात कहकर मामला और उलझा दिया है. राज्य बने उत्तराखंड को बने 17 साल हो गए लेकिन अब भी प्रदेश की स्थाई राजधानी कहां होगी यह बात अब तक तय नहीं हो पाई है. राज्य में अब तक तीन दो बार बीजेपी और दो बार कांग्रेस की सरकार रह चुकी है लेकिन सभी अस्थाई राजधानी देहरादून से ही काम चलाती रहीं.

भाजपा, कांग्रेस और के साथ ही राज्य के क्षेत्रीय दल यूकेडी ने भी चुनाव के समय गैरसैण को उत्तराखंड की राजधानी बनाने का वायदा अपने-अपने घोषणा पत्र में किया तो जरूर लेकिन सरकार बनने के बाद यह वादा जैसे वह भूल जाते रहे. अब राज्य में त्रिवेंद्र सिंह रावत के नेतृत्व में भाजपा की सरकार है लेकिन पार्टी यह तय नहीं कर पाई है की गैरसैंण को स्थाई राजधानी बनाए या फिर गीष्मकालीन राजधानी. पार्टी अध्यक्ष अजय भट्ट कहते हैं कि भाजपा की सरकार गैरसैण को गीष्मकालीन राजधानी बनाएगी लेकिन मुख्यमंत्री इस सवाल को टाल जाते हैं.

मुख्यमंत्री के बयान के दो अर्थ नहीं निकाले जा सकते. इसका सीधा और एकमात्र अर्थ यह है कि गैरसैंण के मुद्दे पर अभी कुछ तय नहीं है और शीतकालीन सत्र सिर्फ भावनाओं को भुनाने की कोशिश है. राज्य में 17 में से 10 साल तक सत्तासीन रही कांग्रेस इस बयान पर हमलावर हो गई है. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष और विधायक प्रीतम सिंह ने कहा कि महत्वपूर्ण मुद्दों पर भाजपा और सरकार यानि संगठन और सरकार में स्पष्ट मतभेद नजर आ रहे हैं।

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