मीट देखो, मीट की धार देखो, सरकारी खजाना, मीट की तरी में तैरता, उस पार देखो

maria500

(इन्द्रेश मैखुरी)
उत्तराखंड की सियासत में बरेली के एक व्यक्ति को दर्जाधारी मंत्री बनाने पर इन्द्रेश मैखुरी का यह लेख साफ-साफ बयां कर रहा है कि हरीश रावत किसी भी व्यक्ति को कहीं भी फिट कर सकते हैं। उन्होंने साफ-साफ लिखा है कि पहले ही इतने सलाहकार थे क्या कमी हो गई थी जो बरेली से सलाहकार मंगवाना पड़ा? इस पर उनका यह व्यंग मीट देखो, मीट की धार देखो, सरकारी खजाना, मीट की तरी में तैरता, उस पार देखो सोशल साइड पर खूब वाहवाही बटोर रहा है।

मीट देखो, मीट की धार देखो, सरकारी खजाना, मीट की तरी में तैरता, उस पार देखो, और इस बीच उत्तराखंड के सरकारी खजाने पर मुख्यमंत्री हरीश रावत का सर्जिकल स्ट्राइक जारी है। दो दिन पहले खबर आई कि सरकारी खजाने का कुछ अंश रावत साहब ने बरेली के एक मीट कारोबारी की जेब में जाने का बंदोबस्त कर दिया है.हरीश रावत के पास पहले ही ढेर सारे सलाहकार हैं.अच्छे-अच्छों के कान कतरने वाले हरीश रावत को ये सलाहकार क्या सलाह देते होंगे,ये तो रावत ही जाने.खास बात सिर्फ यही है कि सलाहकार होने बाद बढ़ जाता है सलाहाकार का आकार-प्रकार.उत्तराखंड के रहने वाले जो सलाहकार हैं,वे अपना पूरा आकार ले चुके होंगे, शायद.इसलिए हरीश रावत ने सोचा होगा कि पडोसी प्रदेश के शकील कुरैशी साहब के आकार और कारोबार में भी कुछ वृद्धि करवाई जाए।

कुरैशी साहब मीट के कारोबारी हैं.हरदा पहाड़ी आदमी हैं,शिकार भात के शौकीन होंगे ही.बाकी सलाहकारों के तो मीट,भात के साथ के “दिमाग भटकन,सत्य उगलन”पेय का बंदोबस्त भी करना ठहरा.पर ये मीट के व्यापारी सलाहकार बनाए गए हैं तो सलाह के साथ मीट भी भेजते रहेंगे.सलाह काम आये,न आये,मीट तो काम आएगी ही, भात के साथ भकोसने के.”कमिशन को मीट भात…..”सिर्फ पिछली सरकार वालों को ही थोड़ी चाहिए था,इस सरकार को भी चाहिए,हर सरकार को चाहिए.इसलिए चाहे दूसरे प्रदेश से लाना पड़े,मीट वाला सलाहकार भी चाहिए।

वैसे तो उत्तराखंड में भी गली-गली में “झटकाध्हलाल मटन शॉप” देखे जा सकते हैं.पर मुख्यमंत्री हैं तो कोई छोटा-मोटा गली के मीट वाला थोड़े उनको सलाह दे सकता है.भाई, बड़े लोग कुत्ता भी रखेंगे तो बड़ा वाला,गुंडा भी पालेंगे तो भारी भरकम.इसलिए झटका मटन शॉप वाला नहीं बड़ा मीट कारोबारी ही मुख्यमंत्री का सलाहकार हो सकता है.इन भारी भरकम सलाहकारों की सलाह हरीश रावत को किस पार लगाएगी, यह तो वक्त ही बतायेगा, फिलहाल तो मीट देखो, मीट की धार देखो, सरकारी खजाना, मीट की तरी में तैरता,उस पार देखो।

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