सोशल मीडिया पर कई लोगों ने दलों की हार जीत भी तय कर दी

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सोशल मीडिया आज के बदलते दौर में भले ही सूचना प्राप्ति का एक जरिया हो लेकिन फिलहाल यह एक अफवाह बन कर लोगों के सामने मौजूद है। अक्सर सोशल मीडिया में लोग इस तरह की फोटो या वीडियो डाल देते है। जिसका आज की घटना से कोई लेना देना नहीं होता। कुछ लोग इसका उपयोग सही कार्याे में भी करते है लेकिन उनकी सत्यता का परिणाम भी अक्सर झूठा साबित हो जाता है। वही कुछ लोगों का मानना है कि आने वाला समय सोशल मीडिया का होगा लेकिन यह बात उतनी ही गलत है जितनी की सोशल मीडिया की सत्यता। अभी हाल ही में दो दिन पूर्व उत्तराखण्ड में हुए आम चुनावों को ही देख लीजिए। सोशल मीडिया में लोगों ने किस तरह अपने अपने तरीके से भाजपा कांग्रेस की जीत का अनुमान व्यक्त किया है कुछ लोगों ने तो उत्तराखण्ड का मुखिया भी तय कर दिया है कौन मुखिया होगा? कौन उसके मंत्रिमंडल में शामिल होंगे? किस किस की जीत होगी। अभी रिजल्ट भी नहीं आया और लोगों ने परिणाम भी घोषित कर दिए। सोशल मीडिया महज एक अपवाद बनकर रह गया हैं। लोग लगतार एक दूसरे को इस मैसेज का भेज रहे है। वैसे देखा जाय तो अगर सोशल मीडिया का सही तरीके से प्रयोग होने लगे तो शायद हर किसी को अपनी ओर लोगों की समस्याओं को व्यक्त करने का मौका मिल सकें लेकिन जिस तरह से आज सोशल मीडिया का दुरूप्रयोग हो रहा है उसे देखकर यही कहा जा सकता है कि युग तो बदल सकता है पर नहीं बदल सकता तो लोगों का नजरिया वही हैं

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