नोट न मिलने से एक और मौत

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रुद्रपुर। डाक्टर ने बीमार के उपचार के लिए बीस हजार रुपये का इंतजाम करने को कहा। पीडित खुद दो दिनों तक लाइन में लगा, मगर उसे अपनी जमा रकम नहीं मिल सकी। अंततः आज उसकी मौत हो गई। परिवार वालों में इस बात को लेकर आक्रोश है कि बैंक ने दो दिन लाइन में लगने के बाद भी बैंक वालों को उस पर तरस नहीं आया। भदईपुरा की राठौर कालोनी निवासी अखलाक यहां ठेके पर मकान बनाने का कार्य करता था। उसे हृदय रोग था। उसका उपचार सिविल लाइन स्थित एक निजी अस्पताल में चल रहा था। डाक्टर ने उससे कहा था कि वह बीस हजार रुपये का इंतजाम कर ले अथवा हल्द्वानी स्थित सुशीला तिवारी अस्पताल चला जाए। चूंकि अखलाक के पंजाब नेशनल बैंक स्थित खाते में रुपये थे, इसलिए वह दो दिन से लाइन में लगा था, लेकिन दुर्भाग्य था कि जब उसका नंबर आता तो बैंक में कैश समाप्त होने का बोर्ड लग जाता। कल भी अखलाक बैंक में लाइन में लगा थर थर कांप रहा था, उसकी पत्नी भी साथ थी। उसने कि बैंक उसे उपचार के लिए भी रुपये नहीं दे रहा है। उस वक्त बैंक के केबिन पर कैश नहीं है का बोर्ड लगा था। अखलाक बेबस था और बैंक अधिकारियों के सामने गिड़गिड़ा रहा था, मगर बैंक अफसरों को उस पर तरस नहीं आया। तमाम लोगों की सिफारिश के बाद बैंक ने छह हजार रुपये ही निकाले।

अखलाक की हालत खराब होती जा रही थी। सुबह उन्हें दिक्कत हुई तो उनके दामाद फिरासत अली उन्हें लेकर जीवनदीप अस्पताल पहुंचे। वहां से डाक्टर ने उन्हें अन्यत्र ले जाने की सलाह दी। अंततः पैसों की व्यवस्था न हो पाने के कारण उसने आज सुबह करीब नौ बजे दम तोड़ दिया। उसकी मौत की खबर सुन कर तमाम लोग उसके आवास पर एकत्र हो गए। लोगों में इस बात को लेकर गुस्सा था कि अखलाक को उसकी जमा धनराशि बैंक वालों ने नहीं निकाली। उसकी पत्नी सलमा का कहना था कि सरकार ने भले ही 24 हजार रुपये तक निकालने की सीमा तय कर रखी हो, मगर बैंक वाले सरकार के निर्देशों पर अमल नहीं कर रहे हैं। उनका कहना था कि यदि बैंक ने 20 हजार रुपये निकाल दिए होते तो अखलाक को समुचित उपचार मिल जाता और शायद उनकी जान बच जाती। पूर्व सभासद राजेश कुमार सिंह का कहना है कि बैंक की लापरवाही के कारण अखलाक की जान गई है। जिसे लेकर लोगों में भारी असंतोष है।

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