नोटबंदीः इस ताकत के भरोसे मोदी ने लिया इतना बड़ा फैसला? विपक्ष का विरोध हुआ फेल..!

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(मनोज सिंह)

नोटबंदी के फैसले पर विपक्ष संसद से लेकर सड़क तक हल्ला मचा रहा है। सरकार घिरी है, और सोशल मीडिया पर पीएम मोदी निशाने पर हैं। वाकई ये फैसला बड़ा और ऐतिहासिक है, ठीक वैसा ही जैसा कि एक समय पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने बैंकों के राष्ट्रीयकरण का लिया था। ऐसे फैसले पूर्ण बहुमत वाली सरकार और पीएम पद पर बैठे एक जनप्रिय चेहरे की लोकप्रियता को कम करने की पूरी तैयारी रखते हैं।
दरअसल, कोई भी सरकार ऐसे कदम तभी उठाती है, जब उन्हें पता होता है कि उनके पास जनसमर्थन है कि नहीं। सरकारों के मुखिया अपनी ही पार्टी के तमाम विरोधाभासों के बीच ऐसे निर्णय की हिम्मत तभी दिखा पाते हैं, जब उन्हें पता होता है कि उनका कदम जनता को कितना पसंद आएगा। राजनीति में इसे जनता का मूड और उसकी नब्ज पहचानना कहते हैं। कुशल राजनीतिज्ञ वही होता है, जो केवल जनता को समझे, उसकी मांग को महसूस कर सके, बाकी विपक्ष का तो काम ही होता है, सरकार के हर कदम का विरोध करना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसे बखूबी जानते हैं।

अब देखिए न..! पेटीएम के मुखिया विजय शेखर शर्मा उत्साहित हैं। पिछले एक हफ्ते से रोजाना करीब 25000 दुकानदार उनके इस ऐप से जुड़ रहे हैं। मार्च 2017 तक करीब 40 लाख दुकानदार पेटीएम की सुविधा का इस्तेमाल करने लगेंगे। विजय शंकर का दावा है कि हजार और पांच सौ के पुराने नोट बंद होने के बाद से ही छोटे शहरों में पेटीएम के जरिए सौदा करने का चलन बढ़ा है। नोटबंदी को लेकर चल रही बहस में शर्मा एक समाधान के साथ खड़े हैं, लेकिन विपक्ष और कुछ अर्थशास्त्री इस फैसले पर संदेह और समस्या के साथ ही खड़े दिखाई दे रहे हैं। यही वजह है कि ज्यादातर जनता बैंक की लाइनों खड़ी है, ना कि इन शंका और साजिश की कहानियों के साथ घूम रहे विपक्षी नेताओं के साथ।

विजय शेखर शर्मा प्रधानमंत्री का शुक्रिया अदा करते हैं। वे कहते हैं कि उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था को डिजिटल मनी की ओर ले जाने की दिशा में सार्थक कदम उठाया है। मगर शायद उन्हें और हम सबको भारत की जनता का शुक्रिया अदा करना चाहिए, जो लाख तकलीफों के साथ भी बैंक की लाइन में खड़ी है, ना की सड़कों पर उतरी है। हालांकि ऐसा बिल्कुल भी नहीं है कि जनता के मन में आशंका नहीं है। विपक्ष के कई नेता इस जनता को सड़क पर उतरने के लिए लगातार भड़काऊ भाषण भी दे रहे हैं, लेकिन सवाल यह है कि आखिर ऐसा क्या है, जो भारत की जनता सड़कों पर नहीं उतरी है। कहानी बेहद संवेदनशील है। नोटबंदी के करीब दो हफ्ते हो रहे हैं। बैंकों की लाइन में लगे 50 से ज्यादा लोग कई वजहों से मर चुके हैं। लाखों शादियों पर इसका असर पड़ा है। छोटे और मंझोले कारोबारी, दिहाड़ी मजदूर, दुकानदार और सड़क किनारे रेहड़ी लगानेवालों की रोजी-रोटी पर नोटबंदी का बुरा असर है। ये भारत की आम जनता है, जिसे इकोनॉमिक्स और आंकड़े समझ में नहीं आते। पेट की आग भी उनके अपनों की मौत और कुछ ना कर पाने की लाचारी के बावजूद वो एक उम्मीद देख रहे हैं। बेहतर भविष्य की उम्मीद। सरकार, प्रधानमंत्री, नेता क्लास और विजय शेखर शर्मा जैसे उद्यमियों पर यह भारतीय जनता का कर्ज है।

इधर, विपक्ष लगातार आशंका जता रहा है कि यह एक गलत फैसला है, अगर ऐसा है भी तो अब इस फैसले को सही करने की जिम्मेदारी अब ऊपर के सभी लोगों पर ही है, जो इसका समर्थन कर रहे हैं, क्योंकि लोकतंत्र में जनता अपना विश्वास एक सरकार में निहित करती है, जो उसके लिए फैसले लेती है। जनता का यही भरोसा सरकारों की ताकत होता है। एक ऐसी ताकत, जिसके आगे पूरी राजनीति नतमस्तक है। ऐसी शक्ति, जो राजा को रंक और रंक को राजा बनाती है, फर्श पर रहने वालों को अर्श दिखाती है और अर्श वालों को फर्श। फिर जनसमर्थन की इसी ताकत को मोदी बेहतर जानते हैं। उन्हें पता है कि जनता सड़क पर नहीं उतरी है और वह बैंकों की लाइन में है, यानी की उनके फैसले के साथ है, और वही उनकी फैसले लेने की ताकत भी है।

दरअसल, हमारे लोकतंत्र की सबसे बड़ी मजबूती हमारी आजादी की लड़ाई में निहित है, जब महात्मा गांधी ने अहिंसा के जरिए सत्ता यानी आजादी हासिल करने का मंत्र दिया। हमने बिना हथियार उठाए बिना कोई नरसंहार किए आजादी हासिल की और यही हमारे देश की जनता के खून में भी है। आज तमाम तकलीफें सहकर भी अगर सड़क पर नहीं उतरी है, तो इसके पीछे उसी बापू की सीख ही है, जो हमार नोटों पर मौजूद हैं। जरा सोचिए..! यदि आजादी हमने हथियारबंद लड़ाई लड़कर हासिल की होती तो आज का भारत आज के जितना सहनशील कभी होता? नोटबंदी का बुरा असर अभी कम नहीं हुआ है, खासकर ग्रामीण भारत में इससे होनेवाली तकलीफें अभी और बढ़ सकती है। मगर देश की जनता लाइन में है, सड़क पर नहीं, इसके लिए भारत की जनता को एक सलाम तो बनता ही है।

(लेख के विचार पूर्णतः निजी हैं , एवं शंखनाद टुडे न्यूज पोर्टल इसमें उल्लेखित बातों का न तो समर्थन करता है और न ही इसके पक्ष या विपक्ष में अपनी सहमति जाहिर करता है। इस लेख को लेकर अथवा इससे असहमति के विचारों का भी शंखनाद टुडे न्यूज पोर्टल स्वागत करता है । इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है। आप लेख पर अपनी प्रतिक्रिया shankhnaadtoday7@gmail.com पर भेज सकते हैं।)

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