पर्वतीय जिलों में भी बनेंगे नर्सिंग इंस्टीट्यूट 

उत्तराखंड में निजी नर्सिंग संस्थान खोलने और सीटें बढ़ाने के लिए राज्य में दो चरणों में जनवरी और जून में आवेदन किए जाते हैं. 2018-19 से वर्ष में एक बार ही इस बारे में आवेदन किए जाने का फैसला किया गया है. मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह की अध्यक्षता में बुधवार को सचिवालय में निजी नर्सिंग संस्थानों को अनापत्ति दिए जाने से सम्बन्धित इम्पावर्ड कमेटी की बैठक में यह फैसला लिया गया। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि नर्सिंग के नए पाठ्यक्रमों के संबंध में निजी संस्थानों की सुविधा को देखते हुए अब वर्ष में एक बार ही आवेदन जमा कराए जाएं. कार्य के सरलीकरण व व्यवहारिकता को देखते हुए निरीक्षण दल द्वारा प्रवेश प्रक्रिया से पूर्व पुनः भौतिक निरीक्षण करने पर भी विचार किया गया।

पाठ्यक्रम को एक समान बनाने और संसाधनों के सही इस्तेमाल के लिए देहरादून में संचालित स्टेट कॉलेज नर्सिंग और स्टेट स्कूल ऑफ नर्सिंग को एक ही संस्थान के रूप में सम्मिलित करने का निर्णय लिया गया। राज्य के विभिन्न जिलों में पांच एएनएम सेन्टर, जो अभी स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग के तहत संचालित होते हैं, उन्हें अब चिकित्सा शिक्षा विभाग के नियंत्रण में चलाया जाएगा। मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश के 25 निजी नर्सिंग संस्थान चल रहे हैं, जो 4 मैदानी जिलों तक ही सीमित हैं. पर्वतीय जनपदों में भी नर्सिंग संस्थान खोलने के नए प्रस्ताव तैयार कर निवेशकों को आमंत्रित किया जाए।

बागेश्वर और उत्तरकाशी में कोई नर्सिंग कॉलेज नहीं है. उन्होंने कहा कि इन जिलों में कॉलेज खोलने के लिए निजी संस्थानों को आमंत्रित करने के साथ ही विद्यार्थियों को बेहतर रोजगार हेतु कैंपस चयन की प्रक्रिया अपनाई जाए. मुख्य सचिव ने कहा कि स्पष्ट और निश्चित संस्तुतियों के लिए निरीक्षण दल को पुनर्गठित किया जाए।

बैठक में अन्य राज्यों की तरह ही स्टेट मेडिकल फैकल्टी, स्टेट नर्सिंग काउंसिल, पैरामेडिकल काउंसिल, डेन्टल काउंसिल और मेडिकल काउंसिल को चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग से स्थानान्तरित कर चिकित्सा शिक्षा विभाग के तहत लाने का निर्णय लिया गया. नर्सिंग छात्रों के लिए कौशल विकास विकसित करने के उद्देश्य से तीनों राजकीय मेडिकल कॉलेजों में छात्र-छात्राओं को प्रयोगात्मक प्रशिक्षण दिए जाने पर सहमति दी गई।

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