10 रुपए के स्टांप पेपर पर जिस्म बेचती हैं बच्चियां, कहां? पढ़िए यह खबर!

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पहले भी हमने कई प्रथाओं के बारे में सुना और पढ़ा है लेकिन ऐसी कुप्रथा के विषय में पहली बार संज्ञान में आ रहा है आखिर स्टांप पेपर पर किस तरह बच्चियों के जिस्म का सौदा किया जाता है। गुजरात के अंदर साटा-पाटा भी एक प्रथा थी लेकिन मध्यप्रदेश के शिवपुरी के आस-पास के गांव में इस कुप्रथा ने सबको अचंभित कर दिया है।

कहते हैं कि बेटियां सदा के लिए होती है लेकिन शिवराज सिंह के राज में मध्यप्रदेश में बच्चियां पढ़ने के बजाए अपने जिस्म की बोली 10 रुपए में स्टांप पेपर पर लगा रही हैं। जिन बच्चों को पढ़ाई के लिए सरकार को आगे आना चाहिए था वहीं मध्यप्रदेश में इस खबर ने प्रदेश के हालात का जो सच बयां किया है उसको लेकर पूरे भारत के लोग सकते में हैं कि आखिर बेटियां 10-10 रुपए में अपने को बेचने पर क्यों मजबूर हो रही हैं? आखिर सरकार क्या कर रही है? जिस प्रथा ने इन बच्चियों को नर्क की ओर जाने पर मजबूर किया है उसे प्रथा नहीं कुप्रथा कहा जाएगा। क्या आपने किसी ऐसी प्रथा के बारे में सुना है, जिसमें लड़िकयों के जिस्मों को बेचा जाए। वह भी दस रुपए के स्टाम्प पर। यदि आप सोच रहे हैं कि ऐसा नहीं है तो आप गलत सोच रहे हैं।

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हम आपको बता रहे हैं एक ऐसी ही प्रथा के बारे में जो कुप्रथा बन गयी है। यह प्रथा है मध्य प्रदेश के शिवपुरी कि जो धड़ीचा प्रथा के नाम से प्रचलित है। औरतों की खरीद फरोख्त की इसी प्रथा की शिकार कल्पना अब तक दो पति बदल चुकी है और दो साल से दूसरे पति रमेश के साथ रह रही है। ठीक उसी तरह रज्जो पहले पति को छोड़कर अब दूसरे पति के साथ है। दरअसल यहां प्रथा की आड़ में गरीब लड़कियों का सौदा होता है और उनकी मंडी लगती है। इसमें पुरुष अपनी पसंदीदा औरत की बोली लगाते हैं। सौदा तय होने के बाद बिकने वाली औरत और खरीदने वाले पुरुष के बीच अनुबंध किया जाता है और यह अनुबंध 10 रुपये से लेकर 100 रुपये तक के स्टाम्प पर किया जाता है।

यह बताते चले कि घटना का मुख्य कारण है लिंगानुपात। एक अनुमान के मुताबिक यहां हर साल करीब 300 से ज्यादा महिलाओं को दस से 100 रूपये तक के स्टांप पर खरीदा और बेचा जाता है इतना ही नहीं शर्त के अनुसार खरीदने वाले व्यक्ति को महिला को एक निश्चित रकम देना पड़ता है। रकम अदा करने के बाद, रकम के अनुसार महिला निश्चित समय के लिए उस व्यक्ति की बहू या पत्नी बन जाती है। रकम ज्यादा होने पर संबंध स्थाई या फिर संबंध खत्म हो जाते हैं।

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फिर अनुबंध खत्म होने के बाद लौटी महिला का दूसरे के साथ सौदा कर दिया जाता है। कई बार इसे सरकार के समक्ष उठाया गया। लेकिन इसका कोई ठोस सबूत अभी तक पेश नहीं किया गया है। क्योंकि यहां पर इस खेल में शामिल महिलाएं या कोई पीड़ित खुलकर सामने नहीं आता और न ही कोई इसके खिलाफ आवाज उठाता है। जिसके कारण यह धंधा यहां पर ऐसे ही चल रहा है। आखिर कब मध्यप्रदेश सरकार और महिला आयोग जागेगा और इन बच्चियों के भविष्य की सुध लेगा यह अभी भविष्य के गर्भ में है।

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