आस्कर में इस बार भारत के हाथ कुछ नहीं आया

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इस बार के आॅस्कर पुरस्कारों के मंच से भारत पूरी तरह से नदारद रहा। बाॅलीवुड की देसी गर्ल प्रियंका चोपड़ा जरूर वहां पहुंची , लेकिन वह रेड कार्पेट तक सीमित रहीं, जबकि पिछले साल उन्होंने आॅस्कर के मंच से बेस्ट एडीटिंग का अवाॅर्ड दिया था। इस बार उनको मंच पर आने का कोई मौका नहीं मिला। स्लमडाॅग मिलेनियर के स्टार रहे भारतीय मूल के अभिनेता देव पटेल की दावेदारी बेस्ट सपोर्टिंग रोल की थी। उम्मीद की जा रही थी कि उनको द लायन के लिए ये अवाॅर्ड मिलेगा, लेकिन ये अवाॅर्ड बेस्ट फिल्म का पुरस्कार जीतने वाली मूनलाइट के लिए महेर्शला अली को मिल गया। इस साल भारत की ओर से नामांकित हुई तमिल फिल्म विसरनई पहले ही दौर में इस मुकाबले से बाहर हो गई थी। विदेशी भाषा की फिल्मों की श्रेणी में आमिर खान की लगान के बाद कोई और फिल्म अंतिम दौर में नहीं पहुंची , जबकि रहमान और गुलजार को स्लमडाॅग मिलेनियर के लिए आॅस्कर मिले। इससे पहले गांधी के लिए ड्रेस डिजाइनर भानु अथैया को आॅस्कर मिला था। स्लमडाॅग मिलेनियर और गांधी दोनों भारत पर बनीं, लेकिन दोनों का निर्माण विदेशी कंपनियों ने किया, इसलिए उनको भारतीय फिल्म नहीं माना जाता।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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