धीरे-धीरे खुल रही है काले धन की पोल

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मंगलवार को पलवल की यस बैंक की शाखा में हुई। एक किसान ने एकमुश्त 67 लाख रुपये जमा करवाये। उक्त किसान के खाते में पहले से तकरीबन दो लाख रुपये थे। बैंककर्मियों की आंखे तब खुली की खुली रह गई जब बोरे से उक्त किसान ने नोटों की गड्डी निकाली। नोट बेहद पुराने थे और उनमें पावडर लगे हुए थे। दरअसल, ये पावडर लगे हुए नोट ही इस बात की चुगली कर रहे थे इसे कहीं तिजोरी आदि में वर्षो से छिपा कर रखा हुआ था। नकदी को छिपा कर रखने वाले उसे सुरक्षित रखने के लिए उनमें पावडर लगा देते हैं।
कुछ ऐसी ही घटना एनसीआर के आइडीबीआइ सरकारी बैंक की एक शाखा में कार्यरत कर्मचारी उस समय भौचक्के रह गये जब हर महीने अपने बैंक खाते में 50-60 हजार रुपये जमा कराने वाले एक कारोबारी ने एकमुश्त 21 लाख रुपये जमा करवाया।
बैंकों में तेजी बढ़ रही है पुराने नोटों की संख्या
देश में बड़े नोटों पर लागू पाबंदी के एक हफ्ते हो गये। इन एक हफ्ते में बैंक खातों की जमा राशि में जिस रफ्तार से बढ़ोतरी हो रही है उससे एक बात साफ है कि देश में काले धन का आकार सामान्य सोच से कई गुणा ज्यादा है। इस बारे में जो सूचनाएं बैंकों की तरफ से वित्त मंत्रालय को भेजी जा रही है वह आगे चल कर बेहद अचंभित करने वाली साबित हो सकती है। वित्त मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि अभी तक ऐसा लगता था कि बड़े धन्ना सेठों के पास ही काला धन है लेकिन जो सूचनाएं आ रही हैं उससे साफ है कि छोटे मोटे कारोबारी समुदाय के पास भी उम्मीद से कई गुणा ज्यादा काला धन है। खेती कार्य में लगे लोगों के खाते में भी खूब राशि जमा हो रही है। लेकिन अब लोग ज्यादा कर चुका कर भी काले धन से निजात पाना चाहते हैं।
बैंकों के लॉकर ऑपरेशन में भारी बढ़ोतरी से भी बढ़ा शक
काला धन बैंकों में आ रहा है इसका अंदाजा बैंकों के लॉकर ऑपरेशन में कई गुणा की हुई बढ़ोतरी से भी होता है। जिन शाखाओं में लॉकर हैं वहां पहले एक दिन में मुश्किल से दो-तीन लॉकर में ऑपरेशन होता था अब 15-20 लॉकरों के संचालन के लिए उनके मालिक सामने आ रहे हैं। नोएडा स्थित एक निजी बैंक में काम करने वाले अधिकारी ने बताया कि एक स्थानीय शिक्षक ने 13 लाख रुपये जमा करवाये और पूछने पर बताया कि एक प्रापर्टी विवाद में उसे ये रुपये मिले थे जिसे वह सामने नहीं ला सका था। लेकिन अब इस पर जो भी जुर्माना होगा दे कर उसे सफेद बनाना चाहता है। इस तरह के कई उदाहरण सामने आ रहे हैं। देश में कितनी ब्लैक मनी है इस बारे में ठोस अंदाजा अभी तक नहीं लगाया जा सका है। यूपीए-दो की तरफ से गठित चार समितियां तक इसका अंदाजा नहीं लगा पाई। आर्थिक मामलों के सचिव शक्ति कांत दास के मुताबिक बाजार में कुल 17 लाख करोड़ रुपये की नकदी है। इसमें तकरीबन 14.5 लाख करोड़ रुपये की राशि 500 व 1000 रुपये के हैं। देश के सबसे बड़े उद्योग चैंबर सीआइआइ इनका 20 फीसद तक ब्लैक मनी हो सकता है जो शायद ही फिर से सिस्टम में वापस लौटे।
आज नोट बंदी पर राज्य सभा में चर्चा के दौरान बिजली, कोयला व नवीन व नवीनकरणीय ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि, सरकार ने आरबीआइ से एक अध्ययन करवाया था जिससे पता चलता है कि जितने सीरिज के नोट बाजार में जारी किये गये थे उनमें से 50 फीसद सकुर्लेशन में थे ही नहीं। इनका ज्यादा हिस्सा काले धन के तौर पर छिपा कर रखे जाने के संकेत हैं।

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