प्रतापशाही का तिहाड़ जेल में लिखा पोस्टकार्ड हुआ वायरल

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5 अक्टूबर 1994 को श्री प्रताप शाही का तिहाड़ जेल से मुझे भेजा गया यह पोस्टकार्ड देखने में साधारण लगता है। मगर जूम कर पढ़ेंगे तो यह एक दस्तावेज है जो हमारे उन नेताओं को आइना दिखाता है जिन्होंने खुद को और न जाने कैसे-कैसों को ‘उत्तराखंड आंदोलनकारी’ का तगमा पहना डाला लेकिन असली नायकों को पूछा तक नहीं। यह दस्तावेज उत्तराखंड राज्य के लिए संघर्षरत रहे प्रताप शाही के क्रांतिकारी चेहरे को सामने लाता है। शाही आज रानीखेत से यूकेडी के टिकट पर चुनाव मैदान में कठिन संघर्ष कर रहे हैं।

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अल्मोड़ा के बग्वाली पोखर क्षेत्र के निवासी प्रताप शाही दिल्ली और पहाड़ दोनों जगह उत्तराखंड राज्य आंदोलन की अलख जगाने वाले अग्रणी साथियों रहे हैं। उन्हें 2 अक्टूबर 1994 को दिल्ली रैली के दौरान गिरफ्तार कर तिहाड़ जेल में डाल दिया गया जहां बैरक नम्बर चार में वह 76 आंदोलनकारी साथियों के साथ 14 दिन तक बंद रहे। पत्र के मुताबिक अलग-अलग बैरकों में कुल 350 लोग बंद थे। इस दौरान शाहीजी पर कई तरह के आपराधिक मुकदमे दर्ज किए गए और उन्हें केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अपनी नौकरी से भी हाथ धोना पड़ा। हालांकि बाद में उन्हें बहाल कर दिया गया। अब सम्मानसहित नौकरी से त्यागपत्र देकर वह चुनावी रण में हैं।

यह दस्तावेज तस्दीक करता है कि उत्तराखंड राज्य के लिए जिन लोगों ने सचमुच यातनाएं सहीं और जेल गए, उनकी पड़ताल हमारे नेताओं को जरूरी नहीं लगी। प्रताप शाही को बेशक उत्तराखंड सरकार के दस्तावेजों में आंदोनकारी का दर्जा हासिल न हो लेकिन हमने उनका संघर्ष देखा है और वह हम जैसे कई लोगों के दिलों में एक सच्चे सेनानी के रूप में दर्ज हैं।

अव्वल तो उत्तराखंड के बच्चे-बच्चे ने इस आंदोलन में शिकरत की थी, इस लिहाज से ‘प्रमाण-पत्र’ बांटने का यह फितूर पता नहीं क्यों पाला गया! पर यदि कवायद शुरू की जा चुकी है तो जुगाड़बाजों की बजाय आंदोलन के नायकों को सम्मान देना सरकार का फर्ज होना चाहिए। हम दिल से चाहते हैं कि प्रताप शाही जैसे सच्चे आंदोलनकारी विधानसभा पहुंचें। साथ ही, अपनी कोशिश है कि उनका हौसला बढ़ाने मौके पर जाया जाए।

व्योमेश जुगरान,  वरिष्ठ पत्रकार, नवभारत टाइम्स

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