राज्यसभा टीबी मैं 375 करोड़ घोटाले का अंदेशा

उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने लिया बड़ा फ़ैसला – फिर मुश्किल मेंकांग्रेस – कई नेताओं पर लटकी तलवार हामिद अंसारी भी सवालों में। देश के उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू\ ने एक बड़ा फ़ैसला लिया है, जिसके बाद कई भ्रष्ट अफसरों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं

उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने लिया बड़ा फ़ैसला – फिर मुश्किल मेंकांग्रेस – कई नेताओं पर लटकी तलवार हामिद अंसारी भी सवालों में। देश के उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू\ ने एक बड़ा फ़ैसला लिया है, जिसके बाद कई भ्रष्ट अफसरों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। माना जा रहा है कि भ्रष्टाचार पर लगाम कसने के मक़सद से वेंकैया नायडू ने ये कदम उठाया है।  आपको याद ही होगा कि पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी को जाते-जाते भारत में मुस्लिम असुरक्षित लगने लगे थे और उन्होंने इस बात का जिक्र भी किया था। जिसके बाद खुलासा हुआ था कि कैसे हामिद अंसारी के कार्यकाल के दौरान राज्यसभा की गयी थी। अब देश के उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने इस लूट की जांच के आदेश दे दिए हैं। नए उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने घोटालों की इन रिपोर्ट्स पर संज्ञान लेते हुए राजयसभा टीवी में हुए पूरे खर्च का ईमानदारी से ऑडिट कराने को कहा है। यह जानकारी सामने आई है कि 2011 में राज्यसभा टीवी शुरू होने से लेकर अब तक इस पर 375 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं और इतना ज्यादा बजट तो बड़े-बड़े प्राइवेट चैनलों का भी नहीं होता।
    इस चैनल को राज्यसभा की कार्यवाही दिखाने के लिय शुरू किया गया था, लेकिन भ्रष्टाचार और लूट का आलम देखिये कि हामिद अंसारी और कांग्रेस के करीबियों को नौकरियाँ बाँट दी गयीं। हद तो तब हो गयी, जब इस चैनल ने बाकायदा कमर्शियल फिल्मों का प्रोडक्शन भी शुरू कर दिया था और इसके लिए प्राइवेट प्रोड्यूसर को बिना किसी औपचारिकता के करोड़ों रुपये तक दे दिये गए। गौरतलब है कि राजयसभा टीवी सीधे उप-राष्ट्रपति के अंडर ही आता है। नए उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने इस बात पर हैरानी जताई है कि राज्यसभा टीवी के फंड से 12.50 करोड़ रुपये एक कमर्शियल फिल्म रागदेश’ बनाने के लिए दे दिए गए। फिल्म बनाने के बाद फिल्म के प्रमोशन इत्यादि के नाम पर भी काफी लूट की गयी और इस फिल्म का प्रोड्यूसर राज्यसभा टीवी को नहीं, बल्कि इसके सीईओ गुरदीपसप्पल को बनाया गया। मानो फिल्म के लिए पैसे उन्होंने अपनी जेब से दिए हों। गुरदीप सप्पल हामिद अंसारी के ओएसडी भी थे। जनता के पैसों से बनी इस फिल्म में दिग्विजय सिंह की दूसरी पत्नी अमृता राय को बतौर हीरोइन लिया गया था। राजयसभा टीवी को चलाने के लिए संसद भवन के बाहर एक जगह किराये पर ली गई थी, जिसका किराया 25 करोड़ रुपये था और माना जा रहा है कि ये अपने आप में एक बड़ा घोटाला है। इसके अलावा 3.5 करोड़ रुपये कर्मचारियों को लाने-ले-जाने के लिए कैब सर्विस पर फूंक दिए गए।
यानि जहाँ-जहाँ से हो सकता था, वहां-वहां से लूट की गयी। ख़बरें ये तक हैं कि राजयसभा टीवी की लूट में भी पत्रकारों का ख़ास ख्याल रखा गया। कांग्रेस के वफादार पत्रकारों को राज्यसभा टीवी में गेस्ट एंकर बनाकर हर\ महीने लाखों रुपये बांटे गए और इसके अलावा हामिद अंसारी जितनी बार भी विदेश यात्रा पर गए, उनके साथ राज्यसभा टीवी की एक के बजाय दो टीमें भेजी जाती थीं। इसके अलावा राजयसभा टीवी में नौकरी कर रहे पत्रकारों ने जनता के पैसों से विदेशों में पढ़ाई और स्कॉलरशिप पर भी खूब ऐश की। इन पत्रकारों में दिग्विजय सिंह की पत्नी अमृता राय, द वायर के एमके वेणु, कैच के भारत भूषण, इंडियास्पेंड.कॉम के गोविंदराज इथिराज और उर्मिलेश जैसे नाम शामिल थे।
    ये सभी कांग्रेस के तनखैया पत्रकार माने जाते रहे हैं। राज्यसभा टीवी घोटाले को कांग्रेस का आखिरी घोटाला कहा जा सकता है, क्योंकि 2014 में सत्ता जाने के बाद राज्यसभा वो आखिरी संस्था थी जिस पर कांग्रेस का कब्जा था। अगस्त 2017 में हामिद अंसारी के रिटायर होने के बाद ये कब्जा खत्म हुआ और इस दौरान उनकी अगुवाई में राज्यसभा में कांग्रेस के चाटुकार पत्रकारों की गतिविधियां हमेशा विवादों के साये में रहीं। इस टीम में कांग्रेसियों के अलावा बड़ी संख्या में वामपंथी और जिहादी सोच वाले पत्रकार भी शामिल थे, जिन्होंने सत्ता की मलाई का जमकर मजा उठाया। मगर अब तो जांच शुरू हो गयी है और उम्मीद है कि जल्द ही पोल-पट्टी भी खुलेगी और दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।
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