रियो ओलंपिकः किसी ने मांगे मनमाने पैसे, तो कोई कोच की जगह ले गया मां को

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रियो ओलंपिक की दो पदक विजेताओं पर हो रही धन वर्षा के बीच ओलंपिक में अन्य भारतीय खिलाड़ियों के बेहद निराशाजनक प्रदर्शन का पोस्टमार्टम जारी है और जो आंकड़े सामने आ रहे हैं उससे जाहिर होता है कि खिलाड़ियों ने मनमाने ढंग से पैसे मांगे थे।

रियो ओलंपिक समाप्त हुए 10 दिन गुजर चुके हैं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगले तीन ओलंपिक के लिये कार्यबल बनाने की घोषणा कर दी है लेकिन रियो के प्रदर्शन का पोस्टमार्टम जारी है। रियो ओलंपिक के लिये खिलाड़ियों की तैयारियों को लेकर जो आंकड़े सामने आ रहे हैं वो चैंकाने वाले हैं।

कई खिलाड़ियों ने मनमाने ढंग से पैसा मांगा जो उन्हें दिया गया लेकिन वो उम्मीदों के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर सके। उनके मुकाबले पदक विजेता खिलाड़ियों ने ट्रेनिंग के लिये काफी कम खर्चा लिया और शानदार प्रदर्शन का इतिहास रच डाला। कांस्य पदक विजेता महिला पहलवान साक्षी मलिक ने टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (टॉप्स) के तहत सिर्फ 12 लाख रुपये लिये थे जबकि रजत विजेता बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधू को 44 लाख रुपये आवंटित किये गये थे।

महिला जिमनास्ट दीपा करमाकर को तो मात्र दो लाख रुपये ही मिले थे। हालांकि मंत्रालय ने दीपा से कहा था कि वह अपनी पसंद के किसी देश में ट्रेनिंग कर सकती हैं लेकिन दीपा ने अपने कोच बिसेश्वर नंदी के साथ दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में ही ट्रेनिंग करना पसंद किया। तीनों खिलाड़ियों के कोच भारतीय ही थे।

दूसरी ओर देखा जाए तो कई अन्य खिलाड़ियों की मांगे चैंकाने वाली थीं। बैडमिंटन खिलाड़ी सायना नेहवाल को एक करोड़ से ज्यादा और उनके कोच विमल कुमार को एक लाख रुपये मासिक वेतन दिया गया। डिस्कस थ्रोअर विकास गौड़ा पर एक करोड़ से अधिक खर्च हुये। निशानेबाज हीना सिद्धू को भी टॉप्स के तहत एक करोड़ रुपये की मदद मिली। तीनों में से कोई भी फाइनल में नहीं पहुंच सका।

सायना और विकास तो चोटिल ही थे। मैराथन धाविका कविता राउत ने उटी में अपनी तीन महीने की ट्रेनिंग के लिये 26 लाख का प्रस्ताव साई को दिया था जिनमें से लगभग 19 लाख रुपये तो रहने के लिये ही थे। यानि हर रात का किराया 20 हजार रुपये था। टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्जा की जोड़ीदार प्रार्थना थोंबरे ने सरकार से 60 लाख रुपये मांगे थे जिसमें से उन्हें 30 लाख रुपये दिये गये थे। सानिया और प्रार्थना की जोड़ी पहले ही राउंड में बाहर हो गई थी।

विवादों में रहने वाली फर्राटा धाविक दूती चंद को 30 लाख रुपये आवंटित किये गये थे लेकिन उन्होंने यह कहकर तूफान खड़ा कर दिया था कि उनके पास दौड़ने के लिये जूते नहीं थे। हैरानी की बात है कि टॉप्स में शामिल धाविका के पास जूते खरीदने के लिये पैसे नहीं थे। हालांकि साई ने फिर उन्हें दो लाख रुपये अतिरिक्त आवंटित किये थे। डिस्कस थ्रोअर कृष्णा पूनिया चोट के कारण दो साल बाहर रहीं। राजस्थान में चुनाव लड़ा और फिर अमेरिका में ट्रेनिंग के लिये 40 लाख रुपये मांग लिये। उन्हें यह राशि मंजूर की गई लेकिन वो ओलंपिक के लिये ही क्वालीफाई नहीं कर सकीं।

महिला निशानेबाज हीना सिद्धू को उनके पति रौनक पंडित के साथ ट्रेनिंग के लिये एक करोड़ रुपये मिले लेकिन वह अपनी दो स्पर्धाओं में 10वें और 25वें स्थान पर रहीं। यही नहीं खिलाड़ियों ने अपने परिजनों को ओलंपिक ले जाने में भी जोर लगाया।

सानिया की मां टेनिस टीम की मैनेजर बनीं, गोल्फर अदिति अशोक के पिता कैडी बने, डिस्कस थ्रोअर सीमा पूनिया के पति अंकुश उनके साथ कोच थे। पैदल चाल धाविका सपना पूनिया और शॉट पूटर मनप्रीत कौर के साथ उनके पति पोलैंड में ट्रेनिंग कैंप में गये। विकास अपने पिता शिव को कोच जॉन गुडिना की जगह रियो ले गये। इन सभी का खर्चा सरकार ने उठाया।

भारत का 117 सदस्यीय दल मात्र दो पदकों के साथ लौटा और अब यह सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वो खिलाड़ियों से उनकी ट्रेनिंग और प्रदर्शन का लेखा जोखा ले।

साभारः लाइव हिन्दुस्तान

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