मुख्यमंत्री के कार्यालय ने जलपान में ही गटक लिए 1.46 करोड़ रुपए



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औरों को नसीहत खुद मियां फजीहत! की बात अगर प्रदेश के मुख्यमंत्री हरीश रावत पर चरितार्थ की जाए तो कोई बुरा नहीं होगा प्रतिमाह चार लाख चाय-नाश्ते का खर्चा बीजापुर में मुख्यमंत्री कार्यालय में किया जा रहा है राज्य अपनी वित्तीय माली हालत के लिए रो रहा है और राज्य के मुखिया चाय और नाश्ते पर सरकारी खजाने को जमकर लुटा रहे हैं राज्य की वित्तीय हालत को देखकर लगता है कि राज्य के मुख्यमंत्री संवेदनशील नहीं है राज्य की दशा और दिशा को देखकर लगता है कि उत्तराखंड सिर्फ नेताओं और अधिकारियों के लिए ही बना है जबकि राज्य को बने हुए अभी सिर्फ 16 साल हुए हैं इन वर्षो में राज्य की हालत बद से बदतर होती जा रही है ।

सुनने में अच्छा लगता है कि मीठी-मीठी बातें, बड़े-बड़े वादे लेकिन जब सरकारी धन को लुटाते हैं तो सबकुछ भूल जाते हैं माननीय क्योंकि जनता के टैक्स की गाढ़ी कमाई को किस तरह से हमारे माननीय लुटाते हैं यह तो सिर्फ चाय और नाश्ते का खर्च है अन्य खर्चो पर अगर हम गौर करें तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि राज्य के पैसों को किस तरह से उड़ाया जाता है शंखनाद टुडे टीम की यह रिर्पोट इस बात की ओर इशारा करती है कि बीजापुर गेस्ट हाउस में अगर महीने का लगभग 5 लाख रुपए चाय नाश्ते में उड़ा दिए जाते हैं तो वहां कौन वह लोग हैं जो इन पैसों को उड़ा रहे हैं खुलेगी पोल अगले अंकों में।

एक तरफ प्रदेश में आर्थिकी का रोना और दूसरी तरफ प्रदेश के मुख्यमंत्री के कार्यालय के चाय पानी का बिल प्रतिमाह चार लाख रुपए से ऊपर है इस बात का संकेत है कि मुख्यमंत्री हरीश रावत राज्य की आर्थिकी को लेकर गंभीर नहीं है एक तरफ चार सात अरब रुपए कर्जा और दूसरी तरफ चाय और नाश्ते में करोड़ों रुपए उड़ाना दोनों अलग-अलग पहलू हैं राज्य अपनी आर्थिकी के लिए रो रहा है और हरीश रावत जमकर सरकारी धन का दुरुपयोग अपने और अपने चहेतों पर जमकर लुटा रहे हैं भाजपा नेता अजेंद्र अजय ने आरटीआई के द्वारा जानकारी के बाद यह खुलासा किया है लेकिन मुख्यमंत्री हर बार मंचों से यही रोना रोते हैं कि राज्य की वित्तीय हालत माली है ।

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सीएम कार्यालय की कैंटीन का हर माह चार लाख से ऊपर का बिल चाय नाश्ते का बना है सीएम हरीश रावत के कार्यकाल के दौरान फरवरी 2014 से जुलाई 2016 तक बीजापुर और सचिवालय की दो कैंटीनों में चाय नाश्ते का बिल करीब डेढ़ करोड़ का है। भाजपा नेता अजेंद्र अजय ने आरटीआई से मिली जानकारी के बाद यह खुलासा किया है। भाजपा का आरोप है कि सरकार एक तरफ प्रदेश पर वित्तीय संकट की बात कह रही है जबकि लाखों रुपए चाय नाश्ते में सीएम खर्च कर रहे हैं।

आरटीआई में मिली सूचना के मुताबिक सीएम के सचिवालय स्थित कार्यालय में फरवरी 2014 से जून 2016 तक का बिल 67 लाख से अधिक का है सबसे बड़ी बात है कि सचिवालय में सीएम का आना भी कम ही रहता है लेकिन औसत ढाई लाख का बिल इसी कैंटीन का बन रहा है राज्य संपत्ति विभाग की ओर से दी जानकारी के मुताबिक यह खर्च सीएम कार्यालय की कैंटीन का है जिसमें भोजन और जलपान आदि का खर्च शामिल है सीएम हरीश रावत के बीजापुर स्थित दूसरे कार्यालय में बिल सचिवालय से भी लंबा चैड़ा है बीजापुर कैंटीन में भोजन और जलपान की मासिक खर्च की औसत पौने लाख है बीजापुर कैंटीन में फरवरी 2014 से जुलाई 2016 तक 77 लाख से अधिक का बिल भुगतान किया गया है।


 ajendra-ajayअजेंद्र अजय, भाजपा नेता
सरकार एक तरफ वित्तीय संकट की बात कर रही है सीएस प्रतिदिन केंद्र से पैसा नहीं मिलने का रोना रो रहे हैं दूसरी तरफ उनका कार्यालय हर माह लाखों रुपए चाय नाश्ते पर खर्च कर रहा है जनता के पैसे का इससे अधिक दुरुपयोग नहीं हो सकता है।


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सुरेंद्र अग्रवाल, सीएम के मीडिया सलाहकार
भाजपा दस हजार करोड़ रुपए खर्च कर केंद्र में सरकार बनाने वाली पार्टी है अब राज्य में परिवर्तन यात्रा के नाम पर भीड़ जुटाने से लेकर अन्य संसाधनों पर करोड़ों रुपए खर्च कर रही है ऐसी पार्टी को सीएम जैसे कार्यालय के कैंटीन बिल पर टिप्पणी करना शोभा नहीं देता।

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