उत्तराखंड में ग्रामीण पर्यटन उत्थान योजना शुरू

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(हरीश कंडारी)

उत्तराखंड में पर्यटन विभाग ने ग्रामीण पर्यटन उत्थान योजना शुरू की है, आज के भागादौड़ी के इस दौर में हर कोई सुकून तलाश रहा है। वह मशीनों की घरघराहट की जगह पक्षियों का कलरव सुनना चाहता है। पेड़-पौधों की छांव, पहाड़ से उतरती नदियों की कल-कल, छल-छल और लोक संगीत की मधुर लहरियां उसे अपनी ओर खींचती हैं। जाहिर है यह सब-कुछ तो गांव में ही मिलेगा।

लेकिन, यह विडंबना ही है कि सुविधाओं का अभाव उसे गांव में कदम रखने से रोकता है। इसी को देखते हुए पर्यटन विभाग ने उत्तराखंड में ग्रामीण पर्यटन उत्थान योजना शुरू की है। जिसका लाभ फिलहाल अभी 38 गांवों को मिल भी रहा है और विभाग का दावा है कि जल्द ही 71 और गांव भी योजना का हिस्सा बन जाएंगे।योजना का उद्देश्य देशी-विदेशी पर्यटकों को ग्रामीण परिवेश से परिचित कराने के साथ ही स्थानीय लोगों को पर्यटन गतिविधियों के माध्यम से स्वरोजगार उपलब्ध कराना भी है।

पर्यटक देश-दुनिया के किसी भी हिस्से का क्यों न हो, ग्रामीण परिवेश, वहां के रहन-सहन, खान-पान, संस्कृति आदि को जानने के लिए हमेशा उत्सुक रहता है। फिर उत्तराखंड में तो ऐसे गांवों की कोई कमी नहीं, जो प्राकृतिक सौंदर्य से तो लबरेज हैं ही, यहां का लौकिक सौंदर्य भी अप्रतिम है। पर्यटक इन स्थानों पर आना तो चाहता है, लेकिन सुविधाओं का अभाव उसके कदम रोक देता है। यही वजह है कि ये गांव आज भी पर्यटकों की नजरों से ओझल हैं।

इन्हीं गांवों तक पर्यटकों को लाने के लिए पर्यटन विभाग ग्रामीण पर्यटन उत्थान योजना की शुरुआत की है। फिलहाल योजना के तहत 38 गांवों में पर्यटन सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। साथ ही 71 और गांवों को इसमें जोडने की तैयारी है, जिनका चयन भी हो चुका है। जल्द ही इन्हें भी योजना का लाभ मिलने लगेगा।

जनपदवार गांव होंगे शामिल

पर्यटन विभाग की इस मुहिम के तहत अल्मोड़ा जनपद के जागेश्वर, मावड़ा, आरतोला, मनबजुना, द्वारस्यूं नैनीसार, मंजखोली, कटारमल, गरूदा बंज, देहरादून जनपद के नागथात, कथियान, भराट, लाखामंडल, गाराम मोहना, हनोल, चटरा, स्वारा, उत्तरकाशी जनपद के मुखवा, हर्षिल, धराली, बगोरी, सूखी, रैथल, चंपावत के पंचेश्वर, देबीधुरा, ढुंगरी, फोर्ति, रीठा साहिब, चमोली के नीति, लाता, उर्गम, देवग्राम, देवाली बगड़, ग्वालदम, पोगथा गांव शामिल हैं।

वहीं, अन्य जनपदों में जैसे रुद्रप्रयाग के सारी, तुंगनाथ, कविल्ठा, दुर्गाधर, फलासी, उधमसिंहनगर के नानकमत्ता, हरिपुरा, गुलारभोज, नैनीताल के हेड़ाखाल, पंकोट, कैंची, चानवटी, सिलौती, नउल, रानीकोट, टिहरी के बंगलों की कांडी, सौड़, मुखेम, चोपति, आराकोट, चैकोल, गजना, टिपरी, उथाड़, हरिद्वार के वीरसनपुर कुंडी, कुंजा बहादुरपुर, पौड़ी गढ़वाल के कोठार, खिर्सू, उफल्डा, कण्वाश्रम, मवाकोट, कलालघाटी, जयहरीखाल, सेंधी, बागेश्वर के सूपी, सामा, रतीरकोटी, किमू, लीति, बडीपन्याली और पिथौरागढ़ के विर्थी, नामिक, फुटशील, मदकोट, मोस्टमानू, चंडाक, नेकिना, धारीगांव शामिल हैं।

इस तरह होगा गांवों का विकास

योजना के अंतर्गत हार्डवेयर व सॉफ्टवेयर दो प्रोजेक्ट शामिल हैं। हार्डवेयर प्रोजेक्ट के तहत गांवों में उद्यानों का विकास, ग्राम पंचायत की सीमा तक सड़कों का निर्माण, सुधार, प्रकाश व्यवस्था, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट व सीवरेज की व्यवस्था, साहसिक खेलों का आयोजन, स्टे होम योजना का विकास आदि का कार्य किए जाएंगे।

जबकि, सॉफ्टवेयर प्रोजेक्ट में फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, स्थानीय संस्कृति एवं प्राकृतिक संपदा का संरक्षण, होटल उद्योग व गाइड, कौशल विकास, अंग्रेजी दक्षता, स्वास्थ्य एवं हाईजेनिक के कार्य शामिल हैं
उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद के अपर निदेशक एके द्विवेदी ने बताया कि सभी गांवों का चयन कर लिया गया है। जल्द ही इन गांवों को योजना का लाभ दिया जाएगा। इससे यहां पर्यटन गतिविधियां तो बढ़ेंगी ही साथ ही स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलेगा।

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