‘ट्यूबलाइट’ फिल्म देखकर निराश होंगे सलमान खान के प्रशंसक

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इस सप्ताह प्रदर्शित फिल्म ‘ट्यूबलाइट’ सलमान खान के फैन्स को निराश कर गयी। सलमान के प्रशंसकों को ईद पर अपने प्रिय अभिनेता की फिल्म का पूरे वर्ष इंतजार रहता है। ‘दबंग’, ‘दबंग-2’, ‘बजरंगी भाईजान’, ‘सुल्तान’ आदि फिल्में दर्शकों का पूर्ण मनोरंजन करती रहीं हैं ऐसी ही उम्मीद इस ईद पर भी दर्शकों को थी लेकिन सलमान को दबंग अंदाज में देखने वाले प्रशंसकों को ट्यूबलाइट में भाईजान को भोंदू दिखाना और उनका उल्टी सीधी हरकतें करना बिलकुल नहीं भाया। बॉक्स आफिस पर सलमान की ट्यूबलाइट ने अब तक जो भी कारोबार किया है वह सिर्फ सलमान के नाम पर ही किया है। सलमान की फिल्में पहले सप्ताह या पहले दो-तीन दिन में ही सौ करोड़ रुपए का कारोबार करने के लिए जानी जाती हैं लेकिन इस बार यह लक्ष्य आसान नहीं है।फिल्म की कहानी 1962 के भारत-चीन युद्ध के काल की है। फिल्म के केंद्रबिंदु में कुमायूं के जगतपुर कस्बे में रहने वाला लक्ष्मण सिंह बिष्ट (सलमान खान) है, जिसे उसके साथी उसकी बेवकूफाना हरकतों के चलते ट्यूबलाइट कहकर पुकारते हैं। लक्ष्मण को उसका छोटा भाई भरत सिंह बिष्ट (सोहेल खान) काफी सपोर्ट करता है। यह दोनों अपने चाचा (ओम पुरी) के साथ रहते हैं। भरत सेना में है और भारत-चीन युद्ध के दौरान उसे भी लड़ाई में जाना पड़ता है। लक्ष्मण कुछ दिनों बाद अपने भाई को मिस करने लगता है और उसे वापस लेने जाने की सोचता है। युद्ध के दौरान ही उनके कस्बे में चीनी महिला ली लिन (जू जू) और उसका बेटा गूवो (मातिन रे तांगुं) आते हैं। चीन से लड़ाई की वजह से नाराज कस्बे वाले उन पर हमला करते हैं, लेकिन लक्ष्मण उनकी मदद करता है। कस्बे में एक जादूगर गोगो पाशा (शाहरुख खान) भी आता है, जो कि लक्ष्मण को विश्वास दिलाता है कि वह चाहे तो कुछ भी कर सकता है। इसी बीच लक्ष्मण को खबर मिलती है कि उसका भाई चीनी फौज की कैद में है। अब वह अपने भाई को छुड़ाने की कोशिश में लग जाता है।अभिनय के मामले में सलमान खान ने निराश किया है। रोने के सीन्स में वह पूरी तरह ओवर एक्टिंग करते नजर आये लेकिन कई जगह वह दर्शकों को हंसाने में सफल रहे हैं। सोहेल खान फिल्म में कहीं से भी सलमान के छोटे भाई नहीं लगे हैं। जीशान अय्यूब खान का काम अच्छा है। ओम पुरी की यह अंतिम फिल्म है वह हमेशा की तरह दर्शकों पर अपनी छाप छोड़ने में सफल रहे। जादूगर के रोल में शाहरुख खान बिलकुल नहीं जमे। जू जू और मातिन रे तांगुं का काम ठीकठाक रहा। फिल्म की कहानी पूरी तरह बिखरी हुई है और कई जगह उपदेश भरकर दर्शकों को बोर किया गया है। निर्देशक के तौर पर कबीर खान इस बार पूरी तरह विफल रहे हैं। वह एक अच्छे विषय के साथ पूरा न्याय नहीं कर पाये। यदि आप सलमान के बहुत बड़े फैन हैं तभी इस फिल्म को देखने जाएं। फिल्म का गीत संगीत और उसका फिल्मांकन अच्छा है।

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