गुरमीत राम रहीम का सबसे पहले कच्चा चिट्ठा छापने वाले शहीद पत्रकार रामचंद्र छत्रपति

 

 

सतीश  लखेडा

2002 में पहली बार गुरमीत राम रहीम रेप प्रकरण की पूरी कहानी अपने सांध्य दैनिक ” पूरा सच ” में छापकर रामचंद्र छत्रपति ने निर्भीक पत्रकारिता की मिसाल दी थी। गुमनाम चिट्ठियों के माध्यम से जिन लाचार साध्वियों ने अपना दर्द बयां किया था उसी को आधार मानकर रामरहीम के ही शहर सिरसा से निकलने वाले सांध्य दैनिक पूरा सच ने बाबा को ललकार दिया था।
रामचंद्र छत्रपति जो कि अधिवक्ता थे और वकालत छोड़ कर उन्होंने पूरा सच अखबार का संपादन शुरू किया । इस पत्र को छापने के बाद उन्हें और उनके परिवार को निरंतर धमकियां मिली किंतु निर्भीक पत्रकार ने कभी भी अपना मनोबल नहीं खोया। उन पर हमला हुआ गोली लगी और अपोलो अस्पताल में उन्होंने अपना दम तोड़ा, बीच में जब उन्हैं होश आया तो उनके बयान दर्ज करने वालों ने बाहुबली गुरमीत रामरहीम का नाम बयान में नहीं लिखा । आखिर रामचंद्र शहीद हो गये। उन्होंने जान दे किन्तु पत्रकारिता के मानदंडों को जिंदा रखा । चैनल के स्टूडियो से दहाड़ने या दूर डेस्क से लिखने की पत्रकारिता से खतरनाक है किसी बाहुबली के शहर में ही उसके खिलाफ खबर छापना। रामचन्द्र ने ये खतरा उठाया।
रामचन्द्र छत्रपति को श्रद्धांजलि देते हुए नमन है उन दो साध्वियों को जिन्होंने लगभग 15 सालों तक तमाम धमकियों डर लोभ – लालच को किनारा करके पूरी तरीके से डटकर CBI का साथ दिया । उन्हीं के साहस के कारण अंधभक्तों के गिरोह का सरदार सलाखों के पीछे हैं। इन दो बहनों के अलावा सतीश नागर जैसा अफ़सर जिसने दिन रात मेहनत करके गुमनाम पीड़िताओं को खोजा। लगभग 18 साध्वियों के हैंडराइटिंग के मिलान उस पत्र से किए उसके बाद उन दो पीड़ित साध्वियों तक पंहुचा जिनमे एक ने पत्र लिखा था, उनको खोजा हौसला दिया ।इस दौरान अनेक दबाओं से नागर को जूझना पड़ा किन्तु नतीजा सबके सामने है।
व्यवस्था में आज भी ईमानदार और जीवट लोग हैं जिनके कारण न्याय व्यवस्था और लोकतंत्र जीवित है।

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