स्कूलों में छात्राओं को मुफ्त नहीं मिलेगा सेनेटरी नैपकिन..

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विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होने के बाद सरकार चुनाव पूर्व की गई घोषणाओं से एक के बाद एक पलटती जा रही है। सरकार ने ऐलान किया था कि सरकारी स्कूलों में छात्राओं को मुफ्त में सेनेटरी नैपकिन मिलेंगे, लेकिन मतदान होने के बाद सरकार अपनी इस घोषणा से पलट गई है। अब इसके लिए छात्राओं से पैसे वसूले जाएंगे। स्वास्थ्य विभाग ने नैपकिन खरीदने का काम शुरू कर दिया है। राज्य में स्वस्थ मातृत्व, शिशु मृत्यु दर को कम करने और लड़कियों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए हरीश रावत सरकार ने राज्य के स्कूलों में छात्राओं के लिए मुफ्त सेनेटरी नैपकिन देने की योजना शुरू की थी। इसके लिए बाकायदा स्वास्थ्य विभाग को निर्देश भी दिए गए थे। अब इस योजना को ही बदल दिया गया है। पहले स्वास्थ्य विभाग के तहत चलाई जाने वाली इस योजना को अब एनएचएम के तहत चलाया जाएगा। स्कूलों में नैपकिन बेचने का काम आशाओं से कराया जाएगा। इसके लिए उन्हें कमीशन भी दिया जाएगा। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग ने नैपकिन के लिए छात्राओं से पैसे वसूलने का निर्णय लिया है। राज्य भर की स्कूली छात्रओं को सेनेटरी नैपकिन देने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने खरीद शुरू कर दी है। इसके लिए टेंडर निकाले गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि दो महीने के भीतर खरीद की प्रक्रिया पूरी होने के बाद छात्राओं को सेनेटरी नैपकिन बेची जाएंगी। एक पैकेट नैपकिन के लिए उनसे छह रुपये लिए जाएंगे जबकि बाजार में इसकी कीमत करीब 40 से 50 रुपये है।

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